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भागलपुर के लड़के के लिए रूस से बिहार आई जूली? सामने आई शादी के दावे की पूरी सच्चाई

बिहार में रूसी महिला के भागलपुर के युवक से शादी करने का वायरल दावा झूठा निकला। जानिए पूर्णिया के नमित और ब्रिटिश NGO से जुड़ी एंड्रिया कॉनोली की असली कहानी।

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सोशल मीडिया पर इन दिनों एक विदेशी महिला और बिहार के युवक की प्रेम कहानी खूब वायरल हो रही है। दावा किया जा रहा था कि रूस की रहने वाली जूली नाम की युवती भागलपुर के राहुल से शादी करने बिहार पहुंची है और दोनों नवंबर में शादी करने वाले हैं। वीडियो में विदेशी महिला को एक साधारण घर के आंगन में घूमते हुए दिखाया गया, जिसके बाद यह कहानी तेजी से चर्चा में आ गई। कई सोशल मीडिया अकाउंट और मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसे प्रेम कहानी के तौर पर पेश किया गया। लेकिन जब इस वायरल दावे की पड़ताल हुई, तो कहानी की हकीकत कुछ और निकली। जांच में पता चला कि न तो युवक का नाम राहुल है और न ही महिला रूस की रहने वाली जूली है। अब इस भ्रामक वीडियो को फैलाने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी की बात सामने आई है।

वायरल प्रेम कहानी में निकला बड़ा झोल, दोनों की पहचान बदली गई

वायरल वीडियो में बताया जा रहा था कि भागलपुर का राहुल रोजगार के सिलसिले में रूस गया था, जहां उसे जूली से प्यार हो गया। इसके बाद युवती अपने प्रेमी से शादी करने बिहार पहुंच गई। हालांकि, पड़ताल में सामने आया कि वीडियो में दिख रहा युवक भागलपुर का नहीं, बल्कि पूर्णिया जिले का रहने वाला नमित है। इसी तरह विदेशी महिला का नाम जूली नहीं, बल्कि एंड्रिया कॉनोली है। वह रूस की नहीं, बल्कि ब्रिटेन के एक गैर-सरकारी संगठन शिविया से जुड़ी हुई हैं। इस तरह सोशल मीडिया पर दिखाई जा रही प्रेम कहानी के मुख्य दावे गलत पाए गए। वीडियो को बिना पूरी जानकारी के साझा किए जाने से बड़ी संख्या में लोग इस कहानी को सच मान बैठे।

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शादी करने नहीं, सामाजिक कार्यों के लिए बिहार आई थीं एंड्रिया

मामले की जानकारी के अनुसार, ब्रिटिश संस्था शिविया बिहार के पूर्णिया में साथी नामक स्थानीय संस्था के साथ मिलकर काम करती है। दोनों संगठन महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने के लिए प्रयास करते हैं। साथी संस्था के समन्वयक अभिषेक कुमार सिंह के मुताबिक, 7 और 8 अक्टूबर को छह महिलाओं की एक टीम अपने कामकाज को देखने के लिए पूर्णिया पहुंची थी। एंड्रिया कॉनोली भी इसी टीम का हिस्सा थीं। इस दौरान उन्होंने स्थानीय महिलाओं से मुलाकात की और उनके घरों का दौरा भी किया। महिलाओं ने उनका स्वागत गुलाब का गुलदस्ता देकर किया था। इन गतिविधियों से जुड़ी तस्वीरें संस्था के सोशल मीडिया अकाउंट पर भी मौजूद थीं। इन्हीं तस्वीरों और वीडियो को कथित प्रेम कहानी से जोड़कर वायरल कर दिया गया।

वायरल वीडियो बनाने वालों पर कार्रवाई की तैयारी

इस मामले में अब सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाने वालों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वायरल दावे की सच्चाई सामने आने के बाद वीडियो बनाने और प्रसारित करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है। सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति की पहचान, राष्ट्रीयता या निजी जीवन को लेकर अपुष्ट दावे करना उसकी छवि को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में किसी भी वायरल वीडियो को सच मानने से पहले उसकी पुष्टि करना जरूरी है। फिलहाल इस मामले में एफआईआर दर्ज होने की आधिकारिक पुष्टि सामने आना बाकी है। यह घटना बताती है कि सोशल मीडिया पर आकर्षक कहानी बनाने के चक्कर में वास्तविक घटनाओं को गलत तरीके से पेश किया जा सकता है।

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