मध्य प्रदेश के भिंड जिले में एक किसान को कथित तौर पर ब्लैकमेल कर रुपये वसूलने का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक महिला ने पहले किसान से नजदीकियां बढ़ाईं और फिर उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें व वीडियो बनाकर उसे धमकाना शुरू कर दिया। किसान से चार लाख रुपये मांगे गए थे। पीड़ित के मुताबिक, वह डर के कारण पहले ही एक लाख रुपये दे चुका था, लेकिन इसके बाद भी पैसों की मांग बंद नहीं हुई। आखिरकार परेशान होकर किसान ने पुलिस से शिकायत कर दी। देहात थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर जाल बिछाया और एक महिला समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। मामले में दो अन्य लोगों की तलाश जारी है।
महिला ने किसान को कैसे फंसाया? फोटो-वीडियो से शुरू हुई ब्लैकमेलिंग
पुलिस के अनुसार, हरनाथपुरा निवासी 53 वर्षीय किसान की मुलाकात बेबी नाम की महिला से हुई थी। आरोप है कि महिला ने पहले उससे बातचीत बढ़ाई और बाद में मिलने के दौरान उसके आपत्तिजनक फोटो और वीडियो बना लिए। इसके बाद महिला ने अपने कथित साथी विश्ववीर के साथ मिलकर किसान पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। पीड़ित का आरोप है कि उसे तस्वीरें और वीडियो सार्वजनिक करने के साथ-साथ एससी-एसटी एक्ट के तहत मामले में फंसाने की धमकी दी गई। इसी डर से उसने एक लाख रुपये दे दिए। हालांकि, आरोपियों की ओर से कथित तौर पर चार लाख रुपये की मांग जारी रही। लगातार मिल रही धमकियों से परेशान होकर किसान ने पुलिस को पूरे मामले की जानकारी दी। पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों को पकड़ने की योजना बनाई।
किसान को 50 हजार रुपये लेकर बुलाया, पुलिस ने मौके पर दबोचा
शिकायत मिलने के बाद देहात थाना पुलिस ने किसान के जरिए महिला से संपर्क कराया। बातचीत के दौरान रुपये देने के लिए एक जगह तय की गई। किसान कथित तौर पर 50 हजार रुपये लेकर वहां पहुंचा। इसी दौरान पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बेबी को पकड़ लिया। इसके बाद उसके साथी विश्ववीर को भी गिरफ्तार कर लिया गया। थाना प्रभारी शिव प्रताप सिंह के मुताबिक, मामले में कुल चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर ममता और बबलू के नाम भी बताए हैं। पुलिस अब इन दोनों की तलाश कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों के पुराने रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। फिलहाल, मामले में आगे की कार्रवाई जारी है और आरोपों की पुष्टि जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी।
ब्लैकमेलिंग से बचने के लिए क्या करें?
इस मामले से एक बार फिर स्पष्ट होता है कि निजी तस्वीरों या वीडियो के जरिए धमकी मिलने पर डरकर पैसे देना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। ऐसी स्थिति में पीड़ित को धमकी भरे संदेश, कॉल रिकॉर्ड और भुगतान से जुड़े सबूत सुरक्षित रखने चाहिए। किसी भी तरह की ब्लैकमेलिंग होने पर पुलिस से संपर्क करना जरूरी है। साथ ही, निजी सामग्री को सोशल मीडिया पर साझा करने से बचना चाहिए और बिना पुष्टि किसी की पहचान या तस्वीर सार्वजनिक नहीं करनी चाहिए। भिंड पुलिस की जांच में अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित गिरोह में अन्य कौन-कौन शामिल था और पहले भी ऐसी घटनाओं को अंजाम दिया गया था या नहीं।
