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‘अगर गांधी आश्रम का न होता तो…’ दिल्ली में प्रदर्शन के बीच ऐसा क्या हुआ कि भड़क उठे अखिलेश यादव?

दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान अखिलेश यादव का कुर्ता फाड़ने की कोशिश! जानें सपा अध्यक्ष ने पुलिस पर क्या बड़े आरोप लगाए और गांधी आश्रम के कुर्ते ने कैसे बचाई उनकी साख।

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राजधानी दिल्ली की सड़कों पर मंगलवार को उस समय सियासी पारा अचानक बढ़ गया, जब विपक्षी दलों के दिग्गज नेता सड़कों पर उतर आए। छात्रों के आंदोलन के समर्थन और पुलिस की कथित बर्बरता के विरोध में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जोरदार मोर्चा संभाला। प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च कर रहे नेताओं को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया। देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन इतने तनावपूर्ण माहौल में बदल गया कि पुलिस ने बड़े नेताओं को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। इसी बीच अखिलेश यादव के साथ कुछ ऐसा हुआ, जिसने इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम को एक नया मोड़ दे दिया और पुलिस के रवैये पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

‘कुर्ता फाड़ने की कोशिश की…’: संसद परिसर में अखिलेश ने बयां किया पूरा माजरा

घटना के अगले दिन जब अखिलेश यादव संसद भवन पहुंचे, तो उन्होंने पत्रकारों के सामने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया। सपा प्रमुख ने बेहद तल्ख लहजे में आरोप लगाया कि हिरासत में लेते समय एक पुलिसकर्मी ने जानबूझकर उनका कुर्ता फाड़ने की कोशिश की। अखिलेश ने कहा, “हमारे कपड़े पकड़े जा रहे थे। आप ही बताइए, पुलिस को यह ट्रेनिंग किसने दी है कि वे नेताओं के कपड़े फाड़ें?” उन्होंने आगे बताया कि जब उन्होंने उस पुलिसकर्मी से पूछा कि वह कुर्ता क्यों खींच रहा है और उसका हाथ पकड़ा, तो वह तुरंत वहां से भाग निकला। अखिलेश ने दावा किया कि अगर उस पुलिस वाले को सामने खड़ा कर दिया जाए, तो वे उसकी शक्ल देखकर तुरंत पहचान लेंगे।

‘बच गई साख’: गांधी आश्रम के धागे और सदरी की मजबूती ने दिया सहारा

अखिलेश यादव ने इस पूरे घटनाक्रम में अपने पहनावे की मजबूती का जिक्र करते हुए एक दिलचस्प और तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि “वो तो कहो कि मेरा कुर्ता गांधी आश्रम का बना था और काफी मजबूत था, वरना दिल्ली पुलिस तो उसे फाड़ ही चुकी थी।” उन्होंने आगे कहा कि उनकी सदरी भी अच्छी क्वालिटी की थी, इसलिए वह भी फटने से बच गई। अखिलेश का कहना था कि इस पूरी घटना के वीडियो और तस्वीरें मौजूद हैं, जो पुलिस की बदसलूकी को साफ उजागर करते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए सवाल उठाया कि क्या कानून व्यवस्था संभालने वाली पुलिस का काम अब विरोध प्रदर्शनों में लोगों और जनप्रतिनिधियों के कपड़े फाड़ना रह गया है?

पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल: विपक्ष ने सरकार को घेरा

इस प्रदर्शन के दौरान केवल अखिलेश यादव ही नहीं, बल्कि कई अन्य नेताओं के साथ भी तीखी झड़प देखने को मिली। अखिलेश यादव ने कहा कि इस धक्का-मुक्की में राहुल गांधी को भी चोटें आईं और सपा सांसदों के साथ भी अभद्र व्यवहार किया गया। पीएम आवास के सामने से देश के इतने बड़े विपक्षी नेताओं को जिस तरह से उठाकर गाड़ियों में डाला गया, उसने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। विपक्षी दलों का कहना है कि लोकतांत्रिक देश में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन दिल्ली पुलिस का यह रवैया दिखाता है कि तानाशाही रवैया किस कदर हावी हो चुका है। फिलहाल, अखिलेश यादव के इस बयान के बाद दिल्ली पुलिस की भूमिका पर चौतरफा सवाल उठ रहे हैं।

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