Delhi Protest: दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकों के अधिकारों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार से मेट्रो सेवाओं, इंटरनेट बंद करने और शहर में लगाए गए बैरिकेड्स को लेकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा। कोर्ट ने अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश भी दिया। सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ शामिल हुए। अब इस मामले में सरकार के जवाब पर सबकी नजरें टिकी हैं।
बैरिकेड्स हटाने और इंटरनेट बहाल करने पर जोर
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। अदालत ने दिल्ली में लगाए गए बैरिकेड्स हटाने और इंटरनेट सेवाएं बहाल करने का निर्देश दिया। साथ ही मेट्रो स्टेशनों पर यात्रियों की आवाजाही और नियमित संचालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया। जस्टिस बागची ने सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि क्या 45 मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास बंद किया गया था। सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि रात 10 बजे से सभी मेट्रो स्टेशन खोल दिए गए थे और कुछ स्टेशनों को सीमित समय के लिए बंद किया गया था।
प्रदर्शनकारियों और वकीलों के साथ कार्रवाई पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कई लोगों को हिरासत में लिया गया और वकीलों के साथ भी पुलिस ने कार्रवाई की। वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने वीडियो और अन्य सामग्री का हवाला देते हुए पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। वहीं, वकील मेनका गुरुस्वामी ने भी अपने साथ हुए कथित व्यवहार का जिक्र किया। अदालत को बताया गया कि लोगों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत आजादी प्रभावित हुई है। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि हिरासत में लिए गए लोगों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई और संबंधित तथ्यों को हलफनामे में रखा जाएगा।
सरकार के जवाब पर टिकी निगाहें, आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोगों के जीवन, स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों की गंभीरता को समझा जा रहा है। अदालत ने सरकार से अनुपालन हलफनामा दाखिल करने को कहा, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि प्रतिबंधों और पुलिस कार्रवाई के संबंध में क्या कदम उठाए गए। सुनवाई में अवमानना याचिकाओं को लेकर भी चर्चा हुई और नई याचिकाओं पर आगे विचार करने की बात कही गई। अदालत ने संकेत दिया कि मामले के सभी पहलुओं को सुनने के बाद उचित आदेश दिया जाएगा। अब सरकार के हलफनामे और अगली सुनवाई से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि दिल्ली में लागू प्रतिबंधों को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।
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