दिल्ली हाईकोर्ट ने 10 दिसंबर को इंडिगो संकट पर केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि यह स्थिति अचानक नहीं बनी, बल्कि कई महीनों से इसके संकेत मिल रहे थे। ऐसे में सवाल यह है कि सरकार इस पूरे समय क्या कर रही थी और हालात को बिगड़ने से पहले रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए। अदालत ने यह भी कहा कि एविएशन सेक्टर पहले से ही कई चुनौतियों से जूझ रहा है, फिर भी सरकार ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया, जिससे यात्रियों की परेशानी बढ़ी और टिकटों के दाम अनियंत्रित होते गए।
किराया बढ़ाने की अनुमति पर कड़ा रुख
हाईकोर्ट ने विशेष रूप से उस फैसले पर सवाल उठाए, जिसमें अन्य एयरलाइंस को टिकट किराया 39 से 40 हजार रुपये तक बढ़ाने की अनुमति दे दी गई थी। अदालत ने पूछा कि जब इंडिगो संकट सामने आ चुका था, तब सरकार को यह देखने की आवश्यकता थी कि टिकट कीमतें अचानक क्यों बढ़ रही हैं और इससे यात्रियों पर क्या असर पड़ेगा। कोर्ट ने साफ कहा कि किराया बढ़ाने की छूट देना एक गंभीर निर्णय है और सरकार को इस पर ठोस जवाब देना होगा कि ऐसी अनुमति किन मानकों के तहत दी गई।
यात्रियों की समस्याओं पर कोर्ट की चिंता
अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि इंडिगो के परिचालन में आई दिक्कतों के बाद हजारों यात्री फंस गए, कई फ्लाइटें रद्द हो गईं और अचानक टिकट दरें कई गुना बढ़ गईं। इसके कारण न केवल आम यात्रियों बल्कि व्यापारिक यात्रियों और छुट्टियों पर निकले परिवारों को भी भारी नुकसान झेलना पड़ा। कोर्ट ने कहा कि एविएशन सेक्टर में ऐसी अव्यवस्था होने से देश की साख पर असर पड़ता है, इसलिए सरकार को तत्काल सख्त और पारदर्शी कदम उठाने चाहिए, ताकि ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
सरकार से विस्तृत प्लान मांगा
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से यह भी पूछा कि आगे ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या पॉलिसी बनाई जा रही है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सरकार अपने सभी फैसलों की समयरेखा और कारण बताने वाला एक विस्तृत हलफनामा पेश करे। इसके साथ ही कोर्ट ने अधिकारियों से पूछा कि टिकट कीमतों को नियंत्रित करने के लिए क्या कोई मानक प्रणाली बनी है या नहीं। अदालत यह समझना चाहती है कि यात्रियों को राहत देने और एयरलाइन सेक्टर में स्थिरता लाने के लिए सरकार क्या ठोस कदम उठाने जा रही है।
