उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर एक चौकाने वाला मामला सामने आया है। यहां टोल प्लाजा में काम करने वाले एंटी ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) के पूर्व मैनेजर आशुतोष सरकार को गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि टोल पर लगे सीसीटीवी कैमरों के जरिए कारों में बैठे कपल के निजी पलों को रिकॉर्ड किया गया। आशुतोष ने पुलिस के सामने कबूल किया कि ढाई साल के दौरान इस तरह के हजारों वीडियो रिकॉर्ड किए गए, लेकिन उनका उद्देश्य कभी भी उन्हें वायरल करना नहीं था।
वायरल वीडियो कैसे हुआ बाहर
आशुतोष सरकार ने पुलिस को बताया कि जो वीडियो वायरल हुआ, वह उनके सीसीसीटीवी सिस्टम से बाहर नहीं गया था। वायरल वीडियो किसी पूर्व कर्मचारी ने टोल परिसर से चुराकर किसी ड्राइवर को दे दिया। पुलिस ने यह भी पता लगाया कि यह कर्मचारी पहले भी असुरक्षित तरीके से वीडियो देखता और उन्हें गलत तरीके से साझा करता था। इस खुलासे ने यह साफ कर दिया कि टोल मैनेजर का निजी वीडियो को वायरल करने का कोई इरादा नहीं था, बल्कि सुरक्षा प्रणाली का दुरुपयोग एक कर्मचारी ने किया था।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
इस मामले में पुलिस ने टोल प्लाजा के आसपास के लोगों और कर्मचारियों से भी पूछताछ की। दैनिक भास्कर की टीम ने यह पता लगाया कि पिछले ढाई साल में कई कपल ऐसे थे जिनके निजी पलों को सीसीटीवी में रिकॉर्ड किया गया, लेकिन सिर्फ यही एक वीडियो वायरल हुआ। पुलिस अब वीडियो के स्रोत और वायरल होने के तरीके की पूरी जांच कर रही है। आशुतोष सरकार के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई है, लेकिन उनका रुख सहयोगी बताया जा रहा है।
सुरक्षा और निजता के सवाल
यह मामला अब लोगों के बीच निजी सुरक्षा और निगरानी के सवाल खड़े कर रहा है। एक्सप्रेस-वे जैसे सार्वजनिक स्थानों पर भी जब सीसीटीवी कैमरे निजी पलों को रिकॉर्ड कर सकते हैं, तो नियमों और सिस्टम की सुरक्षा पर भरोसा कैसे किया जा सकता है, यह चर्चा का विषय बन गया है। अधिकारी अब टोल प्लाजा पर सुरक्षा मानकों को मजबूत करने और कर्मचारियों पर निगरानी बढ़ाने की बात कर रहे हैं। यह मामला न केवल यूपी में बल्कि पूरे देश में निजता के अधिकार पर बहस को भी तेज कर रहा है।
