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‘रॉकेट गिर रहे थे, बंकर में छिपने की आ गई थी नौबत…’ पाक राष्ट्रपति के कबूलनामे से खुली ऑपरेशन सिंदूर की असली कहानी

ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी का बड़ा कबूलनामा सामने आया है. उन्होंने माना कि भारतीय कार्रवाई से पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व में डर का माहौल था और उन्हें बंकर में जाने तक की सलाह दी गई थी. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

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पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने जिस तरह से त्वरित और निर्णायक प्रतिक्रिया दी, उसने पूरे क्षेत्र की राजनीति और सुरक्षा समीकरणों को हिला कर रख दिया. 7 मई को शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ढांचे को निशाना बनाया. इस अभियान में सीमापार स्थित 9 आतंकी ठिकानों पर सटीक और योजनाबद्ध हमले किए गए, जिनका उद्देश्य केवल आतंकवाद के नेटवर्क को कमजोर करना था. भारतीय सेना की इस कार्रवाई को लेकर पहले ही माना जा रहा था कि इसका असर पाकिस्तान की सैन्य और राजनीतिक व्यवस्था पर गहरा पड़ेगा. अब खुद पाकिस्तान के राष्ट्रपति के बयान ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि भारत की कार्रवाई केवल रणनीतिक नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक रूप से भी बेहद प्रभावी रही.

जरदारी का कबूलनामा: शीर्ष नेतृत्व तक फैला डर

शनिवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने जो कहा, उसने इस पूरे घटनाक्रम को एक नया आयाम दे दिया. जरदारी ने स्वीकार किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में भय का माहौल था. उन्होंने बताया कि भारतीय सेना की ओर से हो रहे हमलों को देखते हुए उनके मिलिट्री सेक्रेटरी तक ने उन्हें सुरक्षा के लिए बंकर में जाने की सलाह दी थी. राष्ट्रपति के अनुसार, जब भारतीय सेना की कार्रवाई तेज थी और रॉकेट हमलों की खबरें सामने आ रही थीं, उस समय शीर्ष नेतृत्व में असमंजस और घबराहट साफ महसूस की जा सकती थी. एक राष्ट्राध्यक्ष के स्तर से इस तरह की सार्वजनिक स्वीकारोक्ति यह दर्शाती है कि भारत की सैन्य कार्रवाई ने पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति को किस हद तक प्रभावित किया.

“जंग शुरू हो गई है…” बंकर की सलाह और इनकार

अपने बयान में राष्ट्रपति जरदारी ने उस पल का जिक्र भी किया, जब उन्हें बंकर में जाने को कहा गया. उन्होंने बताया कि उनके मिलिट्री सेक्रेटरी उनके पास आए और कहा कि हालात बेहद गंभीर हैं, जंग जैसी स्थिति बन चुकी है और सुरक्षा के लिहाज से बंकर में जाना बेहतर होगा. हालांकि, जरदारी ने यह भी कहा कि उन्होंने उस सलाह को स्वीकार नहीं किया. बावजूद इसके, यह तथ्य सामने आना कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति को इस तरह की चेतावनी दी गई, बताता है कि भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई से वहां किस स्तर की बेचैनी पैदा हो चुकी थी. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान केवल व्यक्तिगत अनुभव नहीं, बल्कि उस दौर में पाकिस्तान की सामूहिक मानसिक स्थिति को भी दर्शाता है।

7 मई को सफल हुआ था ऑपरेशन सिंदूर

7 मई को शुरू हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद हालात तेजी से बदले. जब पाकिस्तान की ओर से जवाबी कार्रवाई की कोशिश की गई, तो भारतीय सेना ने न सिर्फ उसे नाकाम किया बल्कि पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठानों को भी निशाने पर लिया. इस पूरे घटनाक्रम में भारत ने यह संदेश साफ कर दिया कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीति अब केवल कूटनीतिक विरोध तक सीमित नहीं रहेगी. राष्ट्रपति जरदारी का बयान इस बात का प्रमाण बन गया है कि भारतीय कार्रवाई ने पाकिस्तान को रणनीतिक, सैन्य और मनोवैज्ञानिक तीनों स्तरों पर झटका दिया. जानकारों के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर ने यह दिखा दिया कि भारत अब किसी भी हमले का जवाब ठोस और निर्णायक तरीके से देने की क्षमता और इच्छाशक्ति दोनों रखता है. यही कारण है कि इस अभियान को न सिर्फ सैन्य सफलता, बल्कि एक मजबूत रणनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है.

 

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