बिहार की नई सरकार के गठन के बाद जहां सत्ता पक्ष के कुछ विधायक ही शराबबंदी कानून को खत्म करने की मांग उठा रहे हैं, वहीं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस मुद्दे पर साफ और कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य में शराबबंदी कानून जारी रहेगा और इस पर किसी तरह का पुनर्विचार नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी याद दिलाया कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस फैसले की प्रधानमंत्री द्वारा भी सराहना की जा चुकी है। ऐसे में सरकार इस नीति को पीछे नहीं लेगी। सम्राट चौधरी के इस बयान ने साफ कर दिया है कि सरकार सामाजिक सुधार के इस एजेंडे पर कोई समझौता नहीं करेगी, भले ही राजनीतिक दबाव क्यों न हो।
जीरो टॉलरेंस नीति और अफसरों पर कड़ी नजर
नई सरकार के कामकाज और विजन को लेकर मुख्यमंत्री ने बताया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पहले की तरह जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय खुद इसकी मॉनिटरिंग करेगा और लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर सीधे कार्रवाई की जाएगी। ब्लॉक, अंचल और थाना स्तर तक प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए निगरानी तंत्र को और सख्त किया जा रहा है। अगर किसी स्तर पर काम में ढिलाई पाई गई तो जिम्मेदार अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार का फोकस साफ है—नीतियों को जमीन पर उतारना और जनता को बेहतर सेवाएं देना।
निवेश का बड़ा लक्ष्य और शिक्षा सुधार की तैयारी
राज्य के विकास को गति देने के लिए मुख्यमंत्री ने बड़ा लक्ष्य तय किया है। उन्होंने कहा कि 15 नवंबर तक बिहार में 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश लाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे रोजगार और उद्योग दोनों को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए एकेडमिक कैलेंडर तय करने की योजना पर भी काम हो रहा है। सरकार चाहती है कि स्कूल-कॉलेज समय पर चलें और छात्रों को बेहतर माहौल मिले। सम्राट चौधरी ने यह भी संकेत दिया कि अगर भविष्य में निशांत कुमार मंत्रिमंडल में शामिल होते हैं तो यह स्वागत योग्य कदम होगा, हालांकि यह निर्णय पूरी तरह नीतीश कुमार और उनके परिवार का निजी मामला है।
विपक्ष में टूट के संकेत और घुसपैठ पर सख्ती
राजनीतिक मोर्चे पर भी मुख्यमंत्री ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष में जल्द ही बड़ी टूट देखने को मिल सकती है और कई विधायक सत्ता पक्ष का रुख कर सकते हैं। वहीं राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर चल रही अटकलों को उन्होंने पूरी तरह खारिज किया और कहा कि बिहार में कोई आर्थिक संकट नहीं है। इसके अलावा, सरकारी दस्तावेजों से करीब 22 लाख नाम हटाए जाने के मामले पर भी सरकार सतर्क है। एक विशेष अभियान चलाकर इन लोगों की पहचान की जाएगी और यदि कोई घुसपैठिया पाया गया तो उसे वापस भेजने की कार्रवाई होगी। इससे साफ है कि सरकार प्रशासनिक सख्ती और राजनीतिक मजबूती—दोनों मोर्चों पर एक साथ काम कर रही है।
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