ओडिशा के बालांगीर जिले से सामने आई यह घटना हर माता-पिता को झकझोर देने वाली है। रविवार की शाम टिटिलागढ़ थाना क्षेत्र के शागदघाट गांव में एक मासूम बच्चे की जिंदगी एक पल में बदल गई। कक्षा तीन में पढ़ने वाला बच्चा रोज की तरह दुकान गया था, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि पांच रुपये का एक चिप्स पैकेट उसके लिए जीवनभर का अंधेरा लेकर आएगा। बच्चे ने दुकान से एक स्नैक पैकेट खरीदा, जिसके अंदर एक छोटा सा खिलौना भी था। चिप्स खाने के बाद बच्चे ने खिलौने को आग में फेंक दिया। अगले ही पल ऐसा विस्फोट हुआ, जिसने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया। धमाके की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि खिलौने के टुकड़े सीधे बच्चे की आंख में जा लगे और उसकी आंख की पुतली बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।
विस्फोट इतना तेज कि आंख नहीं बच सकी
धमाके के तुरंत बाद बच्चे की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। खून से लथपथ हालत में बच्चे को तुरंत टिटिलागढ़ अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने घंटों कोशिश की, लेकिन आंख को बचाया नहीं जा सका। चिकित्सकों के अनुसार विस्फोट सीधे आंख के भीतर हुआ, जिससे आंख की पुतली पूरी तरह फट गई और स्थायी नुकसान हो गया। डॉक्टरों ने परिजनों को साफ शब्दों में बताया कि अब बच्चा उस आंख से कभी नहीं देख पाएगा। इतनी कम उम्र में आंख की रोशनी चले जाना न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी बच्चे और उसके परिवार के लिए बेहद पीड़ादायक है। अस्पताल परिसर में मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल था, वहीं गांव में मातम जैसा माहौल बन गया।
माता-पिता का सवाल – बच्चों के खाने में बम क्यों?
घटना के बाद बच्चे के माता-पिता ने टिटिलागढ़ पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। उनका कहना है कि बच्चों के खाने के पैकेट में इस तरह के खतरनाक खिलौने डालना सीधे-सीधे उनकी जान से खिलवाड़ है। पीड़ित बच्चे की मां ने रोते हुए बताया कि उनका बेटा बिस्किट खरीदने गया था, लेकिन दुकान पर उसने चिप्स का पैकेट ले लिया। उन्हें क्या पता था कि वही पैकेट उनके बेटे की आंख छीन लेगा। माता-पिता ने मांग की है कि ऐसे उत्पादों पर तुरंत रोक लगाई जाए और कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। उनका कहना है कि अगर आज आवाज नहीं उठाई गई तो कल किसी और बच्चे के साथ भी यही हादसा हो सकता है।
जांच में जुटी पुलिस, लेकिन सवाल सिस्टम पर
पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए केस दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि स्नैक पैकेट में दिया गया खिलौना किस तरह का था और उसमें विस्फोटक तत्व कैसे मौजूद था। इस घटना ने खाद्य सुरक्षा और बच्चों के उत्पादों की निगरानी व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के लिए बनाए जाने वाले खाद्य पदार्थों में किसी भी तरह का खतरनाक सामान शामिल करना कानूनन अपराध होना चाहिए। यह सिर्फ एक परिवार का दुख नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर लापरवाही कितनी घातक साबित हो सकती है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी सख्ती दिखाता है और क्या ऐसे उत्पादों पर वास्तव में रोक लग पाती है या नहीं।
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