राजस्थान रोडवेज की एक बस में उस समय हड़कंप मच गया, जब भोपाल से कोटा जा रही बस बीच रास्ते में अचानक सड़क किनारे रुक गई। बस में करीब 60 यात्री सवार थे, जो काफी देर तक बस के दोबारा चलने का इंतजार करते रहे। जब यात्रियों ने कारण जानने की कोशिश की तो पता चला कि बस चालक अपनी सीट पर सो रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि चालक शराब के नशे में था। घटना झालावाड़ के मिनी सचिवालय के मुख्य गेट के पास की बताई जा रही है। इस घटना ने यात्रियों की सुरक्षा और रोडवेज की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि अगर बस चलते समय कोई हादसा हो जाता, तो बड़ी जनहानि हो सकती थी।
जगाने पर चालक ने किया हंगामा
यात्रियों और आसपास मौजूद लोगों ने जब चालक को उठाने की कोशिश की, तो वह शांत होने के बजाय बहस करने लगा। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, चालक ने खुद को एक मंत्री का करीबी बताते हुए कहा कि उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। देखते ही देखते वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई और पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस के पहुंचने पर भी चालक का व्यवहार सामान्य नहीं था और उसने पुलिसकर्मियों से भी बहस की। इसके बाद पुलिस ने मामले की जानकारी रोडवेज अधिकारियों को दी। अधिकारियों के पहुंचने के बाद चालक को पुलिस के हवाले कर दिया गया और मामले की जांच शुरू कर दी गई।
कंडक्टर को छोड़कर अकेले बस लेकर निकल गया
घटना को लेकर बस के परिचालक यूनुस ने भी चौंकाने वाली जानकारी दी। उनके अनुसार, बस झालावाड़ बस स्टैंड पर यात्रियों के लिए खड़ी थी और वह खाना खाने गए थे। जब वह वापस लौटे तो बस वहां नहीं थी। बाद में पता चला कि चालक बिना बताए बस लेकर निकल गया और कुछ यात्रियों के साथ कंडक्टर को भी बस स्टैंड पर छोड़ दिया। परिचालक ने बताया कि उन्होंने पीछा कर बस को रुकवाने की कोशिश की और काफी मशक्कत के बाद चालक ने वाहन रोका। इस पूरी घटना ने यात्रियों को परेशान कर दिया और कई लोगों ने चालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
यात्रियों को दूसरी बसों से भेजा गया, जांच शुरू
चालक को हटाने के बाद रोडवेज विभाग ने यात्रियों को दूसरी बसों और अन्य वैकल्पिक साधनों से उनके गंतव्य के लिए रवाना किया। अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और यदि चालक की लापरवाही या नशे में वाहन चलाने की पुष्टि होती है, तो उसके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यात्रियों का कहना है कि सार्वजनिक परिवहन में इस तरह की लापरवाही बिल्कुल स्वीकार नहीं की जा सकती। यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियों में किसी भी तरह की अनदेखी गंभीर परिणाम ला सकती है।
