पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में शनिवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब प्रशासन की टीम भारी पुलिस बल के साथ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी के कार्यालय पहुंची। कुछ ही देर में बुलडोजर लगाए गए और इमारत को तोड़ने की कार्रवाई शुरू कर दी गई। यह कार्यालय अमताला-बारुईपुर रोड पर स्थित था। कार्रवाई की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए। प्रशासन ने पहले ही इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर दिए थे ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना न हो। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद की गई है।
अवैध निर्माण का आरोप बना कार्रवाई की वजह
जिला प्रशासन का दावा है कि सांसद कार्यालय का निर्माण तय नियमों का पालन किए बिना किया गया था। अधिकारियों के अनुसार भवन के लिए जरूरी मंजूरी और स्वीकृत नक्शा उपलब्ध नहीं था। इसी कारण इसे अवैध निर्माण माना गया। प्रशासन ने पहले इस मामले में नोटिस जारी किया था और पक्ष रखने का मौका भी दिया था। बताया जा रहा है कि सुनवाई के लिए दो बार नोटिस भेजे गए, लेकिन निर्धारित समय पर कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई का फैसला लिया। शनिवार को तीन जेसीबी मशीनों की मदद से भवन के अलग-अलग हिस्सों को गिराया गया और पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में रखा गया।
संपत्तियों को लेकर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब अभिषेक बनर्जी और उनके परिवार से जुड़ी कई संपत्तियां चर्चा में हैं। हाल ही में कुछ संपत्तियों को लेकर नगर निकाय की ओर से नोटिस जारी किए गए थे। राजनीतिक गलियारों में भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज है। विपक्षी दलों ने पहले भी कई संपत्तियों को लेकर सवाल उठाए थे और जांच की मांग की थी। हालांकि इन मामलों पर अंतिम फैसला संबंधित विभागों और जांच एजेंसियों के स्तर पर ही होना है। फिलहाल प्रशासन का कहना है कि वर्तमान कार्रवाई केवल भवन निर्माण नियमों के उल्लंघन से जुड़ी है और इसे कानूनी प्रक्रिया के तहत अंजाम दिया गया है।
अब तक नहीं आया टीएमसी या अभिषेक बनर्जी का बयान
कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। हालांकि खबर लिखे जाने तक अभिषेक बनर्जी या तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि कानून सभी के लिए समान है और नियमों का उल्लंघन होने पर कार्रवाई की जाएगी। बंगाल में हाल के महीनों में कई नेताओं और उनसे जुड़े प्रतिष्ठानों पर इसी तरह की कार्रवाई देखने को मिली है। ऐसे में इस घटनाक्रम को राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि टीएमसी इस कार्रवाई पर क्या रुख अपनाती है और आगे इस मामले में क्या नया मोड़ आता है।
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