देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच भारतीय निर्वाचन आयोग ने बड़ा निर्णय लिया है। कई राज्यों में राजनीतिक पार्टियों द्वारा आरोप लगाए जा रहे हैं कि SIR के दौरान वैध वोटरों के नाम भी काटे जा रहे हैं। बिहार, यूपी और बंगाल जैसे राज्यों में विपक्ष इस प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है। इस बीच चुनाव आयोग ने इस अभियान में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों को राहत देते हुए बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) और BLO सुपरवाइजर्स की सैलरी में बड़ा इजाफा किया है। आयोग के इस कदम को उन कर्मचारियों के मनोबल को मजबूत करने के रूप में देखा जा रहा है, जो इस समय अत्यधिक दबाव में काम कर रहे हैं।
12 राज्यों में चल रही SIR प्रक्रिया
चुनाव आयोग फिलहाल देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण करा रहा है। इनमें केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य शामिल हैं, जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इन राज्यों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं, साथ ही SIR की प्रक्रिया को लेकर भी तनाव बढ़ा हुआ है। बंगाल में टीएमसी ने तो यह तक दावा किया कि वर्क प्रेशर के कारण BLO आत्महत्या जैसे कदम उठा रहे हैं। ऐसे माहौल में आयोग का यह नया आदेश कर्मचारियों को बड़ी राहत देता है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची लोकतंत्र की आधारशिला है, इसलिए इसमें लगे प्रत्येक कर्मचारी का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है।
BLO और सुपरवाइजर की सैलरी डबल, ERO-AERO पर यथास्थिति
चुनाव आयोग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, BLO का वेतन 6,000 रुपये से बढ़ाकर 12,000 रुपये कर दिया गया है। वहीं BLO सुपरवाइजर की सैलरी 12,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000 रुपये कर दी गई है। हालांकि असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (AERO) और इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) के वेतन में कोई बदलाव नहीं किया गया है। AERO को 25,000 रुपये और ERO को 30,000 रुपये पहले की तरह ही मिलते रहेंगे। आयोग ने नोटिस में कहा कि 2015 के बाद पहली बार ऐसा बड़ा संशोधन किया गया है। कर्मचारियों की जिम्मेदारी बढ़ने और कार्यभार अधिक होने के चलते यह बदलाव आवश्यक था।
आयोग ने बताया—इलेक्टोरल रोल्स हैं लोकतंत्र की नींव
चुनाव आयोग के नोटिस में कहा गया है कि इलेक्टोरल रोल्स लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव हैं और इन्हें सटीक, पारदर्शी व निष्पक्ष तौर पर तैयार करने की जिम्मेदारी BLO और उनके सुपरवाइजर्स पर होती है। आयोग का मानना है कि यह कार्य बिना किसी भेदभाव, दबाव और ईमानदारी से पूरा किया जाता है, इसलिए ऐसे कर्मचारियों को उचित आर्थिक सहायता और सम्मान मिलना चाहिए। आयोग ने आगे कहा कि पिछले कई सालों से वेतन में बढ़ोतरी न होने के कारण कर्मचारियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। अब नए आदेश के बाद उनसे बेहतर प्रदर्शन की अपेक्षा भी की जा रही है।
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