बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला जब Nitish Kumar ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राजभवन जाकर राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपा और इसके साथ ही करीब दो दशकों तक चले उनके शासन का अंत हो गया। इस्तीफे के बाद उन्होंने बिहार की जनता के नाम एक भावुक संदेश साझा किया, जिसमें अपने कार्यकाल और फैसलों को लेकर खुलकर बात की।
‘जनता की सेवा ही सबसे बड़ा लक्ष्य रहा’
अपने संदेश में नीतीश कुमार ने लिखा कि उन्होंने हमेशा बिहार की जनता की सेवा को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि वर्षों तक लगातार काम करते हुए सरकार ने विकास को केंद्र में रखा। उनके मुताबिक, यह फैसला पहले से तय था कि अब वे मुख्यमंत्री पद से हटेंगे, और उसी योजना के तहत कैबिनेट बैठक के बाद उन्होंने इस्तीफा सौंप दिया।
विकास और सामाजिक संतुलन पर जोर
नीतीश कुमार ने अपने कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने समाज के हर वर्ग के लिए काम किया। उन्होंने हिंदू, मुस्लिम, सवर्ण, पिछड़े, अति पिछड़े, दलित और महादलित समुदायों के लिए योजनाएं लागू करने का जिक्र किया। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और कृषि जैसे क्षेत्रों में हुए काम को उन्होंने अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया। महिलाओं और युवाओं के सशक्तिकरण को भी उन्होंने खास उपलब्धियों में गिना
आप जानते हैं कि 24 नवंबर, 2005 को राज्य में पहली बार एन०डी०ए० सरकार बनी थी। तब से राज्य में कानून का राज है और हम लगातार विकास के काम में लगे हुए हैं। सरकार ने शुरू से ही सभी तबकों का विकास किया है चाहे हिंदू हो, मुस्लिम हो, अपर कास्ट हो, पिछड़ा हो, अति पिछड़ा हो, दलित हो,…
— Nitish Kumar (@NitishKumar) April 14, 2026
2005 से शुरू हुआ सफर, अब नई दिशा की तलाश
नीतीश कुमार ने अपने संदेश में 24 नवंबर 2005 का जिक्र करते हुए बताया कि उसी दिन राज्य में एनडीए सरकार बनी थी और तभी से कानून व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि अब समय है बदलाव का और बिहार नई दिशा की ओर बढ़ेगा। उनके इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में नई संभावनाएं और समीकरण बनते दिख रहे हैं।
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