रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दिल्ली पहुँचने से पहले भारत और रूस के बीच एक अहम रक्षा सौदा पक्का हो गया है। दोनों देशों ने करीब दो अरब डॉलर की न्यूक्लियर-पॉवर्ड सबमरीन को लेकर अंतिम सहमति बना ली है। इस डील पर लगभग एक दशक से बातचीत चल रही थी, लेकिन तकनीकी मुद्दों और समय-सीमा तय होने के बाद अब इसे पूरी तरह से हरी झंडी दे दी गई है। यह पनडुब्बी भारत को लीज़ पर मिलेगी, जिससे भारतीय नौसेना की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।
यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में कई देश समुद्री ताकत बढ़ाने की दिशा में सक्रिय हैं। भारत के लिए यह डील न सिर्फ सैन्य मजबूती का प्रतीक है, बल्कि रूस के साथ पुराने भरोसेमंद संबंधों को और गहरा करती है।
2027 तक डिलीवरी की उम्मीद, नौसेना ने तेज की तैयारी
भारतीय नौसेना को उम्मीद है कि यह परमाणु पनडुब्बी अगले दो वर्षों के भीतर भारत पहुँच सकती है। नौसेना प्रमुखों के अनुसार, भारत चाहता है कि सबमरीन 2027 तक ऑपरेशनल हो जाए। न्यूक्लियर सबमरीन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे लंबे समय तक पानी के नीचे रहकर काम करने की क्षमता होती है और इसे ट्रैक करना बेहद मुश्किल होता है।
भारत ने पहले भी रूस से आईएनएस चक्र नाम की परमाणु सबमरीन लीज़ पर ली थी, जिसने दस वर्षों तक भारतीय समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नई पनडुब्बी के आने से भारत के पास समुद्री चुनौती झेलने के लिए और बेहतर विकल्प उपलब्ध होंगे। नौसेना इससे जुड़ी ट्रेनिंग और भविष्य की तैनाती की योजना पर पहले ही काम शुरू कर चुकी है।
पड़ोसी देशों की बढ़ी चिंता
न्यूक्लियर सबमरीन मिलने से भारत हिंद महासागर और प्रशांत महासागर जैसे विशाल समुद्री क्षेत्रों में और मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकेगा। यह पनडुब्बी आधुनिक तकनीक से लैस होगी और लंबी दूरी तक गश्त कर सकेगी। उसकी स्टेल्थ क्षमता यानी ‘गुप्त रहने की क्षमता’ इतनी उच्च स्तर की होगी कि दुश्मन के लिए इसका पता लगाना बेहद कठिन होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस डील का असर सिर्फ भारत की रक्षा क्षमता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन भी बदल सकता है। चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के लिए भारत की बढ़ती अंडरवॉटर ताकत नई चुनौती बनेगी। खासकर चीन, जो हिंद-प्रशांत में अपने समुद्री विस्तार पर जोर दे रहा है, भारत की इस नई क्षमता को गंभीरता से देखेगा।
पुतिन के भारत दौरे के लिए बना मजबूत माहौल
यह डील पुतिन के भारत आने से पहले भारत–रूस संबंधों को नया आयाम देती है। यह दर्शाती है कि दोनों देशों के रिश्ते रणनीतिक तौर पर कितने मजबूत हैं। इसके अलावा ऊर्जा, व्यापार और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे कई क्षेत्रों में भी दोनों देशों के बीच नए सहयोग की उम्मीद की जा रही है।
रूस और भारत दशकों से रक्षा साझेदार रहे हैं। अब यह नया सबमरीन समझौता उस लंबी साझेदारी को और मजबूत करता है। पुतिन के दौरे के दौरान इस पर औपचारिक घोषणा और आगे की योजनाओं का भी खुलासा हो सकता है। भारत के लिए यह सौदा सिर्फ सैन्य सामान खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य की सुरक्षा रणनीति की रीढ़ साबित हो सकता है।
