Monday, February 2, 2026
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‘पैंट खोलकर धर्म देखा, फिर मौत तक पीटा’ नवादा मॉब लिंचिंग में अतहर की पत्नी के खुलासों से कांपा ज़मीर

नवादा मॉब लिंचिंग केस में इलाज के दौरान अतहर हुसैन की मौत हो गई। पत्नी शबनम प्रवीण ने धर्म पूछकर की गई बर्बरता, प्रशासनिक लापरवाही और इंसाफ की लड़ाई पर चौंकाने वाले खुलासे किए।

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बिहार के नवादा जिले से सामने आया मॉब लिंचिंग का मामला एक बार फिर इंसानियत पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। रोह थाना क्षेत्र में धर्म पूछकर की गई बर्बर पिटाई में गंभीर रूप से घायल 35 वर्षीय मोहम्मद अतहर हुसैन की शुक्रवार देर रात बिहारशरीफ सदर अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। अतहर को गंभीर हालत में पहले नवादा सदर अस्पताल और फिर बिहारशरीफ रेफर किया गया था, जहां कई दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना ने पूरे इलाके में आक्रोश फैला दिया है। पुलिस ने अब तक इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार करने की बात कही है, लेकिन मृतक के परिजनों का कहना है कि यह कार्रवाई नाकाफी है और असली दोषी अभी भी खुलेआम घूम रहे हैं। अतहर की मौत के बाद यह मामला सिर्फ हिंसा का नहीं, बल्कि धर्म के नाम पर की गई क्रूरता का प्रतीक बन गया है।

पत्नी शबनम के आरोप, पैंट खोलकर की गई पहचान

मृतक अतहर हुसैन की पत्नी शबनम प्रवीण ने अपने बच्चों के साथ मीडिया के सामने आकर ऐसे खुलासे किए हैं, जिन्हें सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। शबनम का कहना है कि उनके शौहर को सिर्फ इसलिए मार डाला गया क्योंकि उनका धर्म अलग था। उन्होंने आरोप लगाया कि हमलावरों ने पहले अतहर की पैंट उतरवाकर उनका धर्म देखा, फिर बेरहमी से पिटाई शुरू कर दी। उनके हाथ तोड़ दिए गए, कान काट लिए गए, बिजली का करंट लगाया गया और घंटों तक पीटा गया। शबनम ने रोते हुए कहा कि यह कोई सामान्य मारपीट नहीं थी, बल्कि सोच-समझकर की गई हैवानियत थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद उन्हें न तो प्रशासन की तरफ से कोई सहानुभूति मिली और न ही समय पर न्याय। आज वह अपने छोटे बच्चों के साथ इंसाफ की भीख मांग रही हैं और कह रही हैं कि अगर अब भी दोषियों को सख्त सजा नहीं मिली, तो ऐसे मामले कभी रुकेंगे नहीं।

दो एफआईआर और साजिश का आरोप

शबनम प्रवीण ने प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाते हुए बताया कि उन्होंने 6 दिसंबर की रात करीब 8 बजे रोह थाना में एफआईआर दर्ज कराई थी। लेकिन उनका आरोप है कि इससे पहले ही उनके पति पर चोरी का झूठा आरोप लगाकर सुबह करीब 10 बजे एक अलग एफआईआर दर्ज कर दी गई थी। शबनम का कहना है कि यह सब जानबूझकर किया गया ताकि उनके पति को अपराधी दिखाया जा सके और मॉब लिंचिंग की सच्चाई दबाई जा सके। उन्होंने कहा कि अतहर एक साधारण मजदूर थे और चोरी से उनका कोई लेना-देना नहीं था। शबनम के मुताबिक, प्रशासन की शुरुआती कार्रवाई से ही साफ हो गया था कि मामले को दूसरी दिशा में मोड़ने की कोशिश हो रही है। परिजनों का दावा है कि अगर समय रहते निष्पक्ष जांच होती और घायलों को सही इलाज मिलता, तो शायद अतहर की जान बच सकती थी।

5 दिसंबर की रात की पूरी कहानी और न्याय की मांग

शबनम प्रवीण के अनुसार, 5 दिसंबर को अतहर हुसैन डुमरी गांव से साइकिल से लौट रहे थे। रास्ते में भट्टा गांव के पास 6 से 7 नशे में धुत युवकों ने उन्हें रोक लिया। पहले घर का पता पूछा गया, फिर नाम। जैसे ही अतहर ने अपना नाम मोहम्मद अतहर हुसैन बताया, भीड़ उग्र हो गई। उन्हें जबरन साइकिल से उतार लिया गया, पैसे लूटे गए और हाथ-पैर बांधकर एक कमरे में घसीट ले जाया गया। वहां घंटों तक उन्हें प्रताड़ित किया गया। शबनम का कहना है कि इस घटना ने उनके पूरे परिवार की जिंदगी बर्बाद कर दी है। अब घर का कमाने वाला कोई नहीं रहा और बच्चे डर के साए में जी रहे हैं। परिजन सरकार से मांग कर रहे हैं कि इस मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाए, सभी आरोपियों की गिरफ्तारी हो और परिवार को सुरक्षा व मुआवजा दिया जाए। अतहर की मौत ने यह साफ कर दिया है कि भीड़ की हिंसा सिर्फ एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे समाज को जख्मी कर देती है।

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