FCRA Amendment Bill 2026: संसद के मानसून सत्र में हंगामे के बीच विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 यानी FCRA Amendment Bill को लेकर बड़ा फैसला हुआ है। लोकसभा ने इस विधेयक को दोनों सदनों की संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC के पास भेजने का प्रस्ताव मंजूर कर लिया। विपक्षी सांसदों ने इस कदम का विरोध करते हुए बिल को वापस लेने की मांग की। वहीं, सरकार की ओर से कहा गया कि विधेयक में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो किसी विशेष समुदाय के खिलाफ हो। अब JPC इस बिल के प्रावधानों की समीक्षा करेगी और अपनी रिपोर्ट संसद को सौंपेगी।
हंगामे के बीच लोकसभा में पास हुआ प्रस्ताव
FCRA संशोधन विधेयक को JPC के पास भेजने का प्रस्ताव केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में पेश किया। सदन में विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। विपक्षी दलों ने विधेयक पर आपत्ति जताते हुए इसे संयुक्त समिति के पास भेजने का भी विरोध किया। उनका कहना है कि बिल के प्रावधानों को लेकर कई सवाल हैं और सरकार को इस पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। दूसरी ओर, सरकार ने विधेयक को लेकर अपना पक्ष रखा और इसे जांच के लिए संसदीय समिति के पास भेजने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
किरेन रिजिजू ने विपक्ष से पूछा- एक प्रावधान बताइए
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों पर सवाल उठाया। उन्होंने विपक्षी दलों से कहा कि वे FCRA संशोधन विधेयक में ऐसा कोई एक प्रावधान बताएं जो अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो। सरकार का कहना है कि बिल को लेकर लगाए जा रहे आरोपों के बजाय उसके वास्तविक प्रावधानों पर चर्चा होनी चाहिए। JPC के पास विधेयक जाने के बाद अब समिति इसके अलग-अलग पहलुओं की समीक्षा करेगी। समिति में सरकार और विपक्ष दोनों पक्षों के सांसद शामिल होंगे, जिससे बिल पर विस्तार से विचार करने का रास्ता खुलेगा।
31 सांसदों वाली होगी संयुक्त संसदीय समिति
प्रस्ताव के अनुसार FCRA संशोधन विधेयक की जांच के लिए बनने वाली संयुक्त संसदीय समिति में कुल 31 सदस्य होंगे। इनमें लोकसभा के 21 सांसद और राज्यसभा के 10 सांसद शामिल होंगे। लोकसभा के सदस्यों का नामांकन लोकसभा अध्यक्ष करेंगे, जबकि राज्यसभा के सदस्यों को सभापति नामित करेंगे। समिति में दोनों सदनों के सदस्यों की भागीदारी होगी। इससे विधेयक के प्रावधानों पर दोनों सदनों के सांसदों को अपनी राय रखने का मौका मिलेगा। समिति की बैठकें संसदीय समितियों से जुड़े निर्धारित नियमों के अनुसार चलेंगी।
शीतकालीन सत्र में सामने आएगी JPC की रिपोर्ट
JPC को अपनी रिपोर्ट संसद के आगामी शीतकालीन सत्र 2026 के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक लोकसभा में पेश करनी होगी। समिति की बैठक के लिए कुल सदस्य संख्या का करीब एक-तिहाई कोरम निर्धारित किया गया है। अब समिति विधेयक के प्रावधानों पर विचार करेगी और जरूरत के मुताबिक संबंधित पक्षों से जानकारी लेकर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। इसके बाद रिपोर्ट के आधार पर संसद में बिल की आगे की प्रक्रिया तय होगी। ऐसे में FCRA संशोधन विधेयक पर अब अगली बड़ी नजर JPC की रिपोर्ट और उसकी सिफारिशों पर रहेगी।
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