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अजीत भारती की अग्रिम जमानत पर हाईकोर्ट में सुनवाई, चंद्रशेखर आजाद के विरोध के बीच अब क्या होगा?

अजीत भारती की अग्रिम जमानत याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। चंद्रशेखर आजाद और दिल्ली पुलिस ने जमानत का विरोध किया। जानिए पूरा मामला।

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यूट्यूबर अजीत भारती की अग्रिम जमानत याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई। यह मामला नगीना से लोकसभा सांसद चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ कथित जातिसूचक टिप्पणी से जुड़ा है। दिल्ली पुलिस और आजाद की ओर से पेश वकीलों ने जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस सौरभ बनर्जी ने कहा कि वह याचिका पर आदेश जारी करेंगे। इससे पहले सात सितंबर को निचली अदालत ने भारती को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था।

दिल्ली पुलिस और आजाद के वकील ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस के वकील ने दलील दी कि भारती की कथित टिप्पणियां सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से की गई थीं और उनमें एक विशेष जाति का अपमान करने वाले शब्द शामिल थे। पुलिस का कहना था कि मामले में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 लागू करने के लिए आवश्यक आधार मौजूद हैं। चंद्रशेखर आजाद के वकील ने भी जमानत का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि टिप्पणियां अपमानजनक थीं और जानबूझकर की गई थीं।

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भारती के वकील ने अदालत में क्या दलील दी?

अजीत भारती के वकील ने अदालत से अग्रिम जमानत देने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि केवल जाति का उल्लेख होने से एससी/एसटी अधिनियम के तहत अपराध साबित नहीं होता। इसके लिए जाति के आधार पर किसी व्यक्ति को जानबूझकर अपमानित करने या नीचा दिखाने का इरादा भी होना चाहिए। वकील ने दावा किया कि भारती की टिप्पणी सोशल मीडिया पर चल रही तीखी बहस के संदर्भ में थी। उनके मुताबिक, यूट्यूबर का उद्देश्य सांसद को उनकी जाति के कारण निशाना बनाना नहीं था।

जांच और एफआईआर को लेकर क्या हुआ?

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि भारती को जांच में शामिल होने के लिए कितने नोटिस भेजे गए थे। जज ने यह भी सवाल किया कि क्या पुलिस को आरोपी से हिरासत में पूछताछ की जरूरत है। सरकारी वकील ने बताया कि जांच अधिकारी को भारती का पता दो दिन पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से मिला था, इसलिए अब तक नोटिस नहीं भेजा जा सका। चंद्रशेखर आजाद की शिकायत पर दर्ज एफआईआर में एससी/एसटी अधिनियम, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की धाराएं शामिल हैं। आजाद ने आरोप लगाया है कि भारती ने उनके साथ-साथ अनुसूचित जाति समुदाय और डॉ. भीमराव आंबेडकर के खिलाफ भी आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। हाईकोर्ट के आदेश से आगे की कानूनी प्रक्रिया की दिशा स्पष्ट होगी।

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