गोवा के रोमियो लेन इलाके में स्थित ‘बर्च बाय रोमियो लेन’ नाइट क्लब में लगी भीषण आग ने पूरे देश को हिला दिया था। इस हादसे में 25 लोगों की जान चली गई, जबकि कई गंभीर रूप से झुलस गए। घटना के बाद क्लब के संचालन और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर बड़े सवाल उठे। इसी बीच क्लब के सह-मालिकों में से एक अजय गुप्ता का पहला बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि उनका इस हादसे से कोई सीधा संबंध नहीं है और वे केवल एक ‘स्लीपिंग पार्टनर’ हैं।
अस्पताल में भर्ती होने के बाद गिरफ्तारी
घटना के कुछ दिनों बाद अजय गुप्ता दिल्ली पहुंचे, जहां तबीयत बिगड़ने पर उन्हें लाजपत नगर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ ब्रेन एंड स्पाइन में भर्ती कराया गया। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के समय मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में अजय ने कहा, “मैं लूथरा परिवार के साथ सिर्फ सोने का साथी (स्लीपिंग पार्टनर) हूं, इससे ज्यादा कुछ नहीं।” उनका दावा है कि क्लब के रोज़मर्रा संचालन, निर्माण, सुरक्षा इंतज़ाम या स्टाफ मैनेजमेंट में वे शामिल नहीं थे।
क्लब प्रबंधन पर बढ़ रहे सवाल
घटनास्थल की प्रारंभिक जांच में बताया गया कि क्लब में सुरक्षा के आवश्यक मानकों की कमी थी। आग बुझाने के उपकरण पर्याप्त नहीं थे और इमरजेंसी एग्जिट भी अव्यवस्थित पाए गए। ऐसे में क्लब के मालिकों और मैनेजमेंट टीम की जिम्मेदारी सीधे कठघरे में है। पुलिस सभी साझेदारों और कर्मचारियों से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि लापरवाही किस स्तर पर हुई। अजय गुप्ता के बयान के बाद जांच इस बात की भी होगी कि उनकी साझेदारी कितनी सक्रिय थी और क्या कानूनी रूप से उन्हें जिम्मेदारी से मुक्त किया जा सकता है या नहीं।
पीड़ित परिवारों में रोष, जांच तेज़
हादसे में जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, वे क्लब मालिकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कई परिजनों का कहना है कि इतनी बड़ी लापरवाही बिना मालिकों की जानकारी के संभव ही नहीं। दूसरी ओर, प्रशासन ने जांच को तेज़ कर दिया है और तकनीकी रिपोर्ट तैयार की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि आग किस वजह से लगी और किसकी गलती से इतनी बड़ी त्रासदी हुई। अजय गुप्ता के बयान ने मामले को नया मोड़ दिया है और अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में आगे क्या सामने आता है।
