भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने नेवी जासूसी मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए तीसरे आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला उस समय सामने आया था, जब इस साल नवंबर में कर्नाटक के मालपे इलाके में स्थित शिपयार्ड से जुड़ी एक गंभीर सिक्योरिटी ब्रीच की रिपोर्ट दर्ज की गई थी। जांच में सामने आया कि यह शिपयार्ड कोचीन शिपयार्ड से जुड़ा हुआ है, जहां भारतीय नौसेना के जहाजों से संबंधित कार्य चल रहे थे। शुरुआती जांच में संकेत मिले कि सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाकर कुछ संवेदनशील जानकारियां बाहर भेजी जा रही हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, यह मामला एक संगठित जासूसी नेटवर्क की ओर इशारा करने लगा, जिसने देश की समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
सबकॉन्ट्रैक्टर के कर्मचारियों पर गंभीर आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार, कोचीन शिपयार्ड ने सुषमा मरीन प्राइवेट लिमिटेड को एक सबकॉन्ट्रैक्टर के तौर पर हायर किया था। इसी कंपनी के दो कर्मचारियों पर आरोप है कि उन्होंने इंडियन नेवी के जहाजों से जुड़ी एक बेहद गोपनीय सूची हासिल की। इस सूची में नेवी के जहाजों के पहचान नंबर और अन्य संवेदनशील जानकारियां शामिल थीं, जिन्हें सामान्य परिस्थितियों में किसी बाहरी व्यक्ति तक पहुंचना असंभव माना जाता है। जांच में यह भी सामने आया कि इन जानकारियों को पैसों के बदले साझा किया गया। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस तरह की सूचनाएं दुश्मन देश के लिए बेहद अहम होती हैं, क्योंकि इनके जरिए भारतीय नौसेना की गतिविधियों और जहाजों की पहचान करना आसान हो सकता है।
तीसरे आरोपी की गिरफ्तारी से जांच को नई दिशा
तीसरे आरोपी की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे मामले में कई अहम कड़ियां जुड़ती नजर आ रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी की भूमिका केवल जानकारी जुटाने तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह इसे आगे पहुंचाने में भी अहम कड़ी माना जा रहा है। जांच में यह खुलासा हुआ है कि गोपनीय जानकारी को डिजिटल माध्यमों के जरिए सीमा पार भेजा जा रहा था और इसके बदले मोटी रकम ली जाती थी। माना जा रहा है कि यह जानकारी सीधे तौर पर पाकिस्तान से जुड़े संपर्कों तक पहुंचाई जा रही थी। सुरक्षा एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और क्या इससे पहले भी इस तरह की जानकारी लीक की जा चुकी है। तीसरे आरोपी से पूछताछ के आधार पर आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा, जांच एजेंसियां अलर्ट
इस जासूसी मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संस्थानों में काम करने वाले हर व्यक्ति की भूमिका कितनी संवेदनशील होती है। जांच एजेंसियों ने शिपयार्ड्स और डिफेंस से जुड़े अन्य प्रतिष्ठानों में सुरक्षा प्रोटोकॉल की दोबारा समीक्षा शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। फिलहाल, मामले की जांच तेज कर दी गई है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि लीक हुई जानकारी का दायरा कितना बड़ा है। इस केस ने यह साफ कर दिया है कि जासूसी के तौर-तरीके अब पारंपरिक नहीं रहे, बल्कि ठेकेदारों और सबकॉन्ट्रैक्टर्स के जरिए भी सुरक्षा में सेंध लगाई जा सकती है, जिसे रोकना आने वाले समय की बड़ी चुनौती बन गया है।
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