दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए भीषण बिल्डिंग हादसे ने देश को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे में अपनी जान गंवाने वाले सात छात्रों में चंदौली जिले के रहने वाले मेधावी छात्र अभिषेक भी शामिल थे। दिल्ली के प्रतिष्ठित मोतीलाल नेहरू कॉलेज से बीकॉम सेकेंड ईयर की पढ़ाई कर रहे अभिषेक की इस तरह अचानक मौत से उनके पूरे परिवार और गांव में मातम पसरा हुआ है। माता-पिता ने अपने लाडले को बेहतर भविष्य के लिए दिल्ली भेजा था, लेकिन उन्हें क्या पता था कि जिस इमारत में उनका बेटा अपने सुनहरे कल की नींव रख रहा है, वही एक दिन उसकी कब्रगाह बन जाएगी। इस हृदय विदारक घटना के बाद से स्थानीय स्तर पर भी गहरा शोक व्याप्त है।
मणिकर्णिका घाट पर पसरा सन्नाटा
मंगलवार की सुबह जब अभिषेक का पार्थिव शरीर वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पहुंचा, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। बारिश की बूंदों के बीच जब परिजनों की चीख-पुकार गूंजी, तो वहां मौजूद आम लोगों का कलेजा भी दहल उठा। पिता संतोष खरवार का रो-रोकर बुरा हाल था और उनकी आंखें बस एक ही सवाल पूछ रही थीं कि आखिर उनके बेटे का क्या कसूर था। घाट पर जुटे लोगों ने नम आंखों से युवा छात्र को अंतिम विदा दी। परिजनों का कहना है कि प्रशासन और बिल्डिंग मालिकों की घोर लापरवाही ने एक हंसते-खेलते परिवार का चिराग हमेशा के लिए बुझा दिया है, जिसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती।
लापरवाही और व्यवस्था पर गंभीर सवाल
शोक में डूबे अभिषेक के पिता ने मीडिया से बात करते हुए सिस्टम और बिल्डिंग मालिकों पर तीखा गुस्सा जाहिर किया। उनका साफ तौर पर कहना था कि यदि इमारत में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य चल रहा था, तो छात्रों की जान जोखिम में डालने के बजाय उन्हें पहले ही सुरक्षित बाहर निकाला जाना चाहिए था। देश की राजधानी दिल्ली में पढ़ाई के लिए दूर-दराज से आने वाले छात्रों को अक्सर छोटे कमरों, पीजी और हॉस्टल में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। संचालक पहले ही एडवांस फीस वसूल लेते हैं, लेकिन सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर बच्चों की जिंदगी से सरेआम खिलवाड़ किया जाता है, जिसके लिए सीधे तौर पर लालची मकान मालिक जिम्मेदार हैं।
सुरक्षा को लेकर उठी कड़े कदम की मांग
अभिषेक के पिता संतोष खरवार ने सरकार और प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि दिल्ली और अन्य महानगरों में छात्रों के रहने के स्थानों पर सुरक्षा मानकों की कड़ी जांच होनी चाहिए। उन्होंने भावुक होकर कहा कि जो असहनीय दर्द आज उनके परिवार को झेलना पड़ रहा है, वैसा दिन किसी भी माता-पिता को न देखना पड़े। यह हादसा केवल एक इमारत के गिरने की कहानी नहीं है, बल्कि उन हजारों युवाओं की सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान है जो अपने माता-पिता के सपनों को पूरा करने के लिए महानगरों का रुख करते हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस दर्दनाक हादसे के बाद ऐसे अवैध निर्माणों और लापरवाह हॉस्टल संचालकों के खिलाफ क्या सख्त कार्रवाई करता है।
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