भारतीय रेलवे के इतिहास में एक और बड़ा मील का पत्थर साबित होने वाले फैसले के तहत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई अहम कैबिनेट बैठक में देश के 7 प्रमुख हाई-डेंसिटी नेटवर्क को चार-लेन यानी चार ट्रैक वाला बनाने की हरी झंडी दे दी गई है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि पिछले 12 सालों से देश के रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर के आधुनिकीकरण पर लगातार काम किया जा रहा है, और यह नया फैसला उसी दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। इस मास्टरप्लान के तहत देश के सबसे व्यस्त रूटों पर ट्रेनों के आवागमन को सुगम बनाया जाएगा ताकि यात्रियों को घंटों की देरी और भारी भीड़ से मुक्ति मिल सके।
‘गोल्डन क्वाड्रिलैटरल’ और प्रमुख रूटों का कायाकल्प
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में देश के प्रमुख महानगरों को आपस में जोड़ने वाले रूट्स शामिल हैं। इनमें मुख्य रूप से कोलकाता-दिल्ली, चेन्नई-कोलकाता, दिल्ली-मुंबई और मुंबई-चेन्नई का ‘गोल्डन क्वाड्रिलैटरल’ नेटवर्क के साथ-साथ इसके डायगोनल रूट्स भी शामिल हैं। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के बिलासपुर-कटनी सेक्शन, मुंबई-हावड़ा रूट पर खड़गपुर से झारसुगुड़ा और अरकुनम से रेनिगुन्टा के बीच तीसरी व चौथी लाइन बिछाने के प्रोजेक्ट्स को भी मंजूरी दी गई है। इन पर क्रमशः हजारों करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश किया जा रहा है, जिससे मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों दोनों की रफ्तार को पंख लगेंगे।
40% ट्रैफिक का दबाव और छत्तीसगढ़ पर विशेष फोकस
रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक, देश के कुल 11,000 किलोमीटर लंबे हाई-डेंसिटी कॉरिडोर में से केवल ये 7 कॉरिडोर ऐसे हैं जिन पर रेलवे का लगभग 40 प्रतिशत ट्रैफिक का भारी दबाव रहता है। इनमें से करीब 2,000 किलोमीटर का कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है, जबकि 5,000 किलोमीटर पर काम तेजी से जारी है। शेष 4,000 किलोमीटर के लिए अंतिम डीपीआर और मंजूरियों की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। साथ ही, छत्तीसगढ़ जैसे आदिवासी और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहां दशकों से बुनियादी ढांचे के विकास की दरकार थी।
देश की आर्थिक रफ्तार को मिलेगी नई मजबूती
इन तमाम प्रोजेक्ट्स के पूरा हो जाने से न केवल भारतीय रेलवे की क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होगी, बल्कि देश के औद्योगिक और आर्थिक विकास को भी सीधी गति मिलेगी। भारी ट्रैफिक और कंजेशन की समस्या हमेशा के लिए खत्म होने से समय की भारी बचत होगी और यात्री तथा माल ढुलाई अधिक सुरक्षित व समयबद्ध हो जाएगी। सरकार का यह कदम देश के लॉजिस्टिक्स खर्च को कम करने और आधुनिक भारत के विजन को जमीन पर उतारने की दिशा में एक बेहद ठोस और दूरदर्शी पहल साबित होने जा रहा है।
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