राजधानी दिल्ली के पॉश इलाके सत्य निकेतन में रविवार, 6 सितंबर को हुए पीजी इमारत ढहने के हादसे ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। इस भयानक दुर्घटना के बाद से ही रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है, लेकिन मलबे के बीच अपनों को तलाश रहे लोगों का दर्द कलेजा चीर देने वाला है। ऐसा ही एक मार्मिक मंजर उस वक्त देखने को मिला जब एक छात्र ऋषित अपने जिगरी यार अथर्व को बचाने के लिए मलबे के ढेर के पास पल-पल की उम्मीद लगाए बैठा है। ऋषित की आंखें नम हैं और उसकी आवाज में अपने दोस्त को खोने का खौफ साफ झलकता है, जो अब तक लापता है।
मलबे से आई थी आखिरी कॉल, अब फोन आ रहा है स्विच ऑफ
घटना के बारे में बताते हुए ऋषित ने नम आंखों से साझा किया कि हादसे वाले दिन दोपहर करीब साढ़े तीन बजे अथर्व का फोन आया था। उसने फोन पर कांपती आवाज में बताया था कि वह पीजी की दूसरी मंजिल पर मलबे में बुरी तरह फंस गया है। इसके बाद से ही उसका कोई अता-पता नहीं चल सका है। ऋषित लगातार उसके नंबर पर कॉल कर रहा है, लेकिन अब उसका फोन पूरी तरह से बंद आ रहा है। छत के पास मौजूद अन्य छात्रों के शव तो बरामद किए जा चुके हैं, लेकिन अथर्व के न मिलने से ऋषित की बेचैनी हर गुजरते मिनट के साथ बढ़ती जा रही है।
प्रशासन की लेट-लतीफी पर उठे गंभीर सवाल
इस दर्दनाक हादसे के बीच सिस्टम की लापरवाही पर भी बड़े सवाल खड़े होने लगे हैं। ऋषित ने गुस्से और लाचारी के मिले-जुले भाव से पूछा कि जब इस इलाके में धड़ल्ले से अवैध निर्माण हो रहे थे, तब प्रशासन और एमसीडी की नींद क्यों नहीं खुली? उसने आरोप लगाया कि जिस इमारत में यह हादसा हुआ, उसकी पांचवीं मंजिल पूरी तरह से अवैध थी। ऐसे कई पीजी और इमारतें हैं जहां नियमों को ताक पर रखकर छात्रों को फंसाया जा रहा है। ऋषित ने बताया कि उसने खुद घटना के वक्त मदद के लिए निजी एम्बुलेंस बुलाई थी जो जल्दी पहुंच गई, जबकि सरकारी सहायता काफी देर से मौके पर पहुंची।
छात्रों का आशियाना बना मौत का खंडहर
कभी जिन कमरों में युवाओं की हंसी-गूंज सुनाई देती थी, आज वह जगह सिर्फ ईंट-पत्थर और मलबे का एक लावारिस ढेर बनकर रह गई है। इस मलबे के बीच खड़े होकर रेस्क्यू टीमों की हर गतिविधि पर नजर गड़ाए ऋषित अब भी किसी चमत्कार का इंतजार कर रहा है। उसकी बस यही दुआ है कि उसका दोस्त अथर्व किसी तरह सुरक्षित बाहर आ जाए। यह दुर्घटना सिर्फ एक इमारत के गिरने भर की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्था पर भी करारा तमाचा है जो छात्रों की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रही है।
