कर्नाटक के सियासी गलियारों में इस वक्त वो तूफान उठ रहा है, जिसकी आहट लंबे समय से महसूस की जा रही थी। बेंगलुरु में मुख्यमंत्री के सरकारी आवास ‘कावेरी’ में होने जा रही एक हाई-प्रोफाइल ‘ब्रेकफास्ट मीटिंग’ ने राज्य की राजनीति का पारा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच होने वाली यह मुलाकात महज एक औपचारिक नाश्ता नहीं, बल्कि राज्य में सत्ता के बड़े फेरबदल की आखिरी पटकथा मानी जा रही है। सूत्रों का दावा है कि इस बैठक के तुरंत बाद दोनों बड़े नेता एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं, जिसमें लीडरशिप में बदलाव को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर से पर्दा उठ जाएगा। गौरतलब है कि इससे पहले दिसंबर 2025 में भी ऐसी ही ‘ब्रेकफास्ट डिप्लोमेसी’ देखने को मिली थी, लेकिन इस बार का समीकरण पूरी तरह बदला हुआ है। शिवकुमार के समर्थकों ने तो अभी से उन्हें भावी मुख्यमंत्री बताते हुए सोशल मीडिया पर बधाई संदेशों और पोस्टरों की बाढ़ ला दी है, जिससे साफ है कि परदे के पीछे सब कुछ तय हो चुका है।
राहुल गांधी का ‘दिल्ली ऑफर’ और सिद्धारमैया का डिनर प्लान: कैसे बनी बात?
इस पूरे सियासी ड्रामे के तार सीधे दिल्ली से जुड़े हुए हैं। अंदरूनी सूत्रों की मानें तो कांग्रेस आलाकमान, विशेषकर राहुल गांधी ने सिद्धारमैया से साफ तौर पर मुख्यमंत्री पद छोड़ने और डीके शिवकुमार को कमान सौंपने का आग्रह किया है। हालांकि, सिद्धारमैया जैसे कद्दावर नेता को मनाना आसान नहीं था, इसलिए आलाकमान ने उनके लिए एक बेहद आकर्षक ‘दिल्ली ऑफर’ तैयार किया है। इस फॉर्मूले के तहत सिद्धारमैया को केंद्र की राजनीति में एक बड़ी और राष्ट्रीय भूमिका दी जाएगी। इतना ही नहीं, उनके बेटे यतींद्र सिद्धारमैया को राज्य की नई सरकार में उपमुख्यमंत्री बनाने के साथ-साथ कुछ बेहद महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी देने का भरोसा भी दिया गया है। समझौते को अंतिम रूप देने के बाद, सिद्धारमैया अपने करीबी मंत्रियों और विधायकों के साथ एक विदाई डिनर बैठक करने की योजना बना रहे हैं। माना जा रहा है कि कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और प्रदेश प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला की मौजूदगी में इस ऐतिहासिक बदलाव का औपचारिक ऐलान बेहद सम्मानजनक तरीके से किया जाएगा।
जातीय समीकरण साधने का मास्टरस्ट्रोक: एक सरकार और 4 नए उपमुख्यमंत्री
डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही कर्नाटक में सत्ता संतुलन को बनाए रखने के लिए कांग्रेस एक बिल्कुल नया और चौंकाने वाला फॉर्मूला लागू करने जा रही है। इस नए मास्टरप्लान के तहत सरकार में एक या दो नहीं, बल्कि पूरे चार डिप्टी सीएम (उपमुख्यमंत्री) बनाए जाएंगे। पार्टी का मुख्य उद्देश्य आगामी चुनावों को देखते हुए राज्य के सभी प्रमुख सामाजिक और जातीय वर्गों को एक साथ साधना है। इस सोशल इंजीनियरिंग के तहत दलित, ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग), लिंगायत और अल्पसंख्यक समुदाय से एक-एक चेहरे को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई जाएगी। इस फॉर्मूले को इस तरह तैयार किया गया है कि सिद्धारमैया के हटने के बाद भी उनका पारंपरिक वोट बैंक (अहिंडा) नाराज न हो और डीके शिवकुमार को बिना किसी अंदरूनी कलह के एक स्थिर और मजबूत सरकार चलाने का मौका मिल सके।
रेस में शामिल दिग्गजों के नाम: जानिए किसे मिल सकती है कौन सी कुर्सी
इस नए ‘चार डिप्टी सीएम’ फॉर्मूले के सामने आते ही संभावित चेहरों को लेकर लॉबिंग और कयासों का दौर शुरू हो चुका है। सूत्रों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, दलित कोटे से राज्य के मौजूदा गृहमंत्री जी. परमेश्वर और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियांक खरगे का नाम सबसे आगे चल रहा है। वहीं ओबीसी कोटे से खुद सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया की दावेदारी लगभग पक्की मानी जा रही है। राज्य के सबसे प्रभावशाली लिंगायत समुदाय को साधने के लिए एमबी पाटिल और ईश्वर खंड्रे के नामों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। बात अगर अल्पसंख्यक कोटे की करें, तो इस रेस में केजे जॉर्ज, विधानसभा अध्यक्ष यूटी खादर और जमीर अहमद खान जैसे कद्दावर नेता अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं। हालांकि पार्टी ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगाई है, लेकिन बेंगलुरु से लेकर दिल्ली तक बंद कमरों में चल रही बैठकों से यह साफ है कि बस एक औपचारिक घोषणा का इंतजार है, जिसके बाद कर्नाटक की सियासत में एक नए युग की शुरुआत होगी।
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