ऑस्ट्रेलिया की संसद में सोमवार, 24 नवंबर को हंगामा मच गया जब धुर कट्टरपंथी सीनेटर पॉलीन हैनसन ने संसद के उच्च सदन में बुर्का पहनकर एंट्री की। यह कदम उन्होंने उस समय उठाया जब सार्वजनिक स्थानों पर बुर्के और हिजाब पर बैन लगाने वाले बिल को पेश करने की अनुमति नहीं मिली। हैनसन की इस हरकत ने संसद के अंदर सियासी माहौल को तनावपूर्ण बना दिया और विपक्ष सहित कई सांसदों ने इसे आलोचना का विषय बनाया।
सांसदों ने उठाए गंभीर सवाल
हैनसन के इस कदम की आलोचना विपक्ष और समर्थन दोनों तरफ से हुई। उनके इस प्रदर्शन को कई सांसदों ने नस्लवाद और आस्था के अपमान के रूप में देखा। ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री पेनी वोंग ने कहा कि यह “घृणित और उथला तमाशा” है, जो समाज के कमजोर तबकों को भी प्रभावित कर सकता है। वोंग ने आगे कहा कि हैनसन ने लगभग दस लाख ऑस्ट्रेलियाई लोगों की आस्था का मजाक उड़ाया, और संसद के प्रति उनका व्यवहार अपमानजनक था।
सात दिन के लिए सस्पेंड
हैनसन की हरकत के बाद संसद ने तुरंत कार्रवाई की और उन्हें उच्च सदन, सीनेट से सात दिनों के लिए सस्पेंड कर दिया। यह कदम इस बात का संकेत है कि ऑस्ट्रेलियाई संसद में ऐसे विवादास्पद और अपमानजनक व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सांसदों का कहना है कि संसद का उद्देश्य बहस और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करना है, न कि किसी की व्यक्तिगत नाराजगी दिखाने का मंच बनाना।
विवाद ने बढ़ाई सामाजिक बहस
हैनसन की इस हरकत ने ऑस्ट्रेलियाई समाज में बहस को भी तेज कर दिया है। कई लोगों ने कहा कि यह कदम धर्म और संस्कृति के प्रति असंवेदनशील है, जबकि कुछ कट्टर समर्थक इसे विरोध की अद्वितीय शैली मानते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना से संसद में न केवल आस्था और धार्मिक संवेदनाओं की सुरक्षा की जरूरत उजागर हुई, बल्कि राजनीतिक सस्पेंस और तनाव भी बढ़ा है।
