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तालिबान ने पाकिस्तान को दी खुला धमकी, सर्वोच्च नेता बोले – ‘जब हम NATO से नहीं डरे तो तुम…’

तालिबान के नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने पाकिस्तान को चेतावनी दी: ‘NATO को हराने वाले हम तोपखाने से नहीं डरते।’ ईद-उल-फितर भाषण में सैन्य संघर्ष, प्रशासन और व्यापारियों पर टिप्पणियां और मध्यस्थता का पूरा सच जानें।”

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तालिबान के सर्वोच्च ने ता हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने कंधार की ईदगाह मस्जिद में ईद-उल-फितर की नमाज के दौरान न सिर्फ पाकिस्तान (Pakistan)  बल्कि पूरी दुनिया को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वे हवाई हमलों और तोपखाने की गोलाबारी से डरने वाले नहीं हैं। अखुंदजादा ने अपने भाषण में यह भी जोर दिया कि जिस आंदोलन ने NATO जैसी महाशक्ति को पीछे छोड़ दिया, उसे किसी सैन्य ताकत से नहीं झुकाया जा सकता। उनका यह बयान पाकिस्तान और पश्चिमी देशों के लिए स्पष्ट चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

Pakistan के साथ टकराव और प्रतिक्रिया

अखुंदजादा ने कहा कि पाकिस्तान (Pakistan) द्वारा की गई सैन्य गतिविधियों और दबाव उनके रुख को प्रभावित नहीं कर सकते। उन्होंने यह भी बताया कि अगर वे किसी भी सैन्य ताकत से डरते, तो पश्चिमी ताकतों के साथ हुए युद्ध में उन्हें हार का सामना करना पड़ता। उनका स्पष्ट संदेश यह था कि तालिबान का रुख मजबूत और अडिग है और किसी भी प्रकार की धमकी या युद्धाभ्यास से उनकी नीतियों में बदलाव नहीं आएगा। इस बयान ने पाकिस्तान-तालिबान तनाव को और बढ़ा दिया है और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सरकारी कार्यशैली और कारोबारियों पर टिपण्णी

अखुंदजादा ने अपने भाषण में तालिबान सरकार की कार्यशैली पर जनता की चिंताओं को भी स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि लोगों को नेतृत्व के फैसलों पर सवाल उठाने का पूरा अधिकार है। इसके अलावा, उन्होंने सामान की जमाखोरी और महंगाई बढ़ाने वाले कारोबारियों की भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे गुनाह बताया और कहा कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिए। यह संदेश न केवल प्रशासनिक सुधार की दिशा में था, बल्कि आम जनता के लिए न्याय और पारदर्शिता की ओर भी संकेत करता है।

मध्यस्थता और अस्थायी सैन्य स्थगन

पाकिस्तान (Pakistan) और तालिबान के बीच पिछले कुछ महीनों से बढ़ता तनाव तब चरम पर पहुंचा जब फरवरी में पाकिस्तान (Pakistan) ने सैन्य हमले तेज कर दिए और 16 मार्च को काबुल में कथित पाकिस्तानी हवाई हमले में सैंकड़ों लोग मारे गए। इस पर सऊदी अरब, कतर और तुर्किये जैसी शक्तियों ने मध्यस्थता की। मध्यस्थता के बाद पाकिस्तान ने ईद-उल-फितर के मौके पर 19 से 23 मार्च 2026 तक सैन्य अभियान को अस्थायी रूप से स्थगित करने का निर्णय लिया। अखुंदजादा की सार्वजनिक उपस्थिति और कंधार की मस्जिद की मीनार से उनका भाषण इस टकराव के बीच विशेष महत्व रखता है, क्योंकि वे सार्वजनिक रूप से बहुत कम दिखाई देते हैं।

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