Monday, February 2, 2026
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 नेपाल में तख्तापलट के बाद केपी ओली का पहली बार प्रतिक्रिया, कहा- ‘युवाओं का मासूम चेहरा गुमराह करने के लिए इस्तेमाल हो रहा है’

पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई पुलिस गोलीबारी में मारे गए युवाओं को श्रद्धांजलि अर्पित की और लिपुलेख, कालापानी व लिम्पियाधुरा पर नेपाल के अधिकारों का समर्थन किया।

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नेपाल में तख्तापलट के बाद, पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने पहली बार अपने विचार साझा किए हैं। उन्होंने जन-जेनेरेशन (Gen-Z) के प्रदर्शनकारियों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए उन युवाओं को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की गोलीबारी में अपनी जान गंवाई। ओली ने कहा, “सरकारी कार्यालयों में आगजनी और तोड़फोड़ अचानक नहीं हुई। आपके मासूम चेहरों का इस्तेमाल गुमराह करने के लिए किया जा रहा है।” उनके इस बयान ने नेपाल के राजनीतिक माहौल में हलचल पैदा कर दी है।

केपी ओली ने अपने जीवन के उद्देश्य को फिर से स्पष्ट किया

ओली ने यह भी स्पष्ट किया कि लोकतंत्र की रक्षा करना उनका जीवन का उद्देश्य है और उन्होंने हमेशा शांति के पक्ष में खड़ा होने की बात की। 1994 में गृहमंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “उस समय एक भी गोली नहीं चली थी।” उन्होंने विरोध प्रदर्शनों के पीछे मौजूद शक्तियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि युवा प्रदर्शनकारियों को तोड़फोड़ के लिए उकसाया जा रहा है। उनका यह बयान उस समय आया है जब नेपाल में अंतरिम सरकार बनाने के प्रयास तेज हो गए हैं।

नेपाल के राष्ट्रीय मुद्दों पर दोहराया अपना रुख

पूर्व प्रधानमंत्री ने लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा पर नेपाल के अधिकारों का समर्थन करते हुए इस मुद्दे पर अपने पुराने रुख को दोहराया। ओली ने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य सिर्फ लोकतंत्र की रक्षा करना है, जो नागरिकों को बोलने और सवाल करने का अधिकार देता है। उनके इस बयान ने नेपाल के वर्तमान राजनीतिक संकट को और भी जटिल बना दिया है।

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