अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित दूसरे दौर की वार्ता से पहले ही बड़ा कूटनीतिक झटका सामने आया है। ईरान ने अमेरिका के बातचीत प्रस्ताव को साफ तौर पर ठुकरा दिया है, जिससे मिडिल ईस्ट की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। ईरानी पक्ष का कहना है कि अमेरिका की “अत्यधिक मांगें”, बार-बार बदलता रुख और विरोधाभासी बयान इस गतिरोध की मुख्य वजह हैं। इस बीच यह भी दावा किया गया है कि होर्मुज क्षेत्र और ईरानी बंदरगाहों के आसपास अमेरिकी नौसेना की गतिविधियों को तेहरान ने सुरक्षा और संप्रभुता के खिलाफ माना है। पहले दौर की वार्ता से उम्मीदें जगी थीं, लेकिन अब ईरान के इनकार ने पूरे प्रोसेस को अनिश्चितता में डाल दिया है।
शहबाज शरीफ ने संभाला मोर्चा
इस घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान ने एक बार फिर मध्यस्थ की भूमिका को सक्रिय किया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से फोन पर बातचीत की और क्षेत्रीय हालात पर विस्तार से चर्चा की। इस बातचीत में शहबाज शरीफ ने सऊदी अरब, कतर और तुर्किये के नेताओं के साथ हुई अपनी हालिया बातचीत का भी जिक्र किया, जिसमें क्षेत्रीय शांति और स्थिरता पर जोर दिया गया। पाकिस्तान लगातार कोशिश कर रहा है कि दोनों देशों के बीच तनाव कम हो और वार्ता का रास्ता फिर से खुले। इससे पहले पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की तेहरान यात्रा भी इसी दिशा में एक अहम कूटनीतिक कदम मानी जा रही है।
अमेरिका की तैयारी और पाकिस्तान में बढ़ी हलचल
उधर अमेरिका भी इस पूरे मामले में सक्रिय नजर आ रहा है। व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर पाकिस्तान के दौरे पर पहुंचने वाले हैं। हालांकि, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के शामिल होने को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस्लामाबाद में इस दौरे को लेकर सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई है। रावलपिंडी के नूर खान एयरबेस पर अमेरिकी सैन्य विमान C-17 ग्लोबमास्टर III की लैंडिंग की खबरों ने भी हलचल बढ़ा दी है। रेड जोन की कई सड़कों को बंद कर दिया गया है और बड़े होटलों को अस्थायी रूप से खाली कराया जा रहा है। इससे यह संकेत मिल रहा है कि यह दौरा केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद अहम है।
क्या पाकिस्तान बदल पाएगा ईरान का रुख?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान अपनी कूटनीतिक कोशिशों से ईरान को दोबारा बातचीत की मेज पर ला पाएगा या नहीं। पहले दौर की वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका की अमेरिका और ईरान दोनों ने सराहना की थी, जिससे इस्लामाबाद की उम्मीदें बढ़ी थीं। लेकिन ईरान के अचानक इनकार ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरी स्थिति अभी भी “ओपन एंडेड” है और किसी भी समय नया मोड़ ले सकती है। अमेरिका की आगामी बातचीत और पाकिस्तान की मध्यस्थता आने वाले दिनों में क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा तय कर सकती है या फिर तनाव को और गहरा भी कर सकती है।
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