बांग्लादेश के चर्चित छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद राजधानी ढाका में हालात तेजी से बिगड़ते चले गए। गुरुवार को हादी के निधन की खबर सामने आते ही कई इलाकों में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए। सड़कों पर तोड़फोड़, आगजनी और झड़पों की खबरें आने लगीं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, गुस्साए प्रदर्शनकारी हादी की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे थे। हालात को काबू में लाने के लिए सुरक्षा बलों को अतिरिक्त तैनाती करनी पड़ी, लेकिन इसके बावजूद कई क्षेत्रों में तनाव बना रहा।
सिंगापुर में जनाजा पर रोक, सरकार ने नहीं दी अनुमति
इस बीच एक अहम अपडेट सामने आया कि शरीफ उस्मान हादी की पहली नमाज-ए-जनाजा सिंगापुर में नहीं हो पाएगी। जानकारी के अनुसार, सिंगापुर सरकार ने जनाजे की अनुमति देने से इनकार कर दिया, जिसके चलते इसे रद्द करना पड़ा। हादी का निधन सिंगापुर के सिंगापुर जनरल हॉस्पिटल में हुआ था और उनकी पहली जनाजा नमाज सिंगापुर की एक मस्जिद में प्रस्तावित थी। लेकिन स्थानीय नियमों और कानूनों के चलते इसकी इजाजत नहीं दी गई। इस फैसले के बाद बांग्लादेशी प्रवासी समुदाय में भी मायूसी देखने को मिली।
बांग्लादेश हाई कमीशन का बयान, कानून सम्मान की अपील
सिंगापुर स्थित बांग्लादेश हाई कमीशन ने इस मामले पर आधिकारिक बयान जारी किया। बयान में कहा गया कि शरीफ उस्मान हादी का निधन सिंगापुर जनरल हॉस्पिटल में हुआ, लेकिन स्थानीय अधिकारियों की अनुमति न मिलने के कारण उनकी जनाजा नमाज सिंगापुर में आयोजित नहीं की जा सकी। हाई कमीशन ने इस स्थिति पर दुख व्यक्त करते हुए सिंगापुर में रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों से वहां के कानूनों का सम्मान करने की अपील की। साथ ही, सभी से अनुरोध किया गया कि वे अपनी-अपनी जगह से दिवंगत आत्मा के लिए दुआ करें और शांति बनाए रखें।
शव ढाका रवाना, बांग्लादेश में अंतिम संस्कार की तैयारी
इंकलाब मंच की ओर से जारी बयान में बताया गया कि शरीफ उस्मान हादी का शव बांग्लादेश भेजा जा रहा है। बांग्लादेश एयरलाइंस की एक कमर्शियल फ्लाइट शुक्रवार को स्थानीय समय अनुसार दोपहर 3:30 बजे शव के साथ रवाना होगी और इसके शाम करीब 6:05 बजे ढाका पहुंचने की उम्मीद है। ढाका पहुंचने के बाद हादी की अंतिम रस्में अदा की जाएंगी। माना जा रहा है कि उनके अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में समर्थक और छात्र संगठन शामिल हो सकते हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। हादी की मौत ने न सिर्फ बांग्लादेश की राजनीति को झकझोर दिया है, बल्कि छात्र आंदोलनों और सामाजिक माहौल पर भी गहरा असर डाला है।
