पाकिस्तान में एक नई राजनीतिक और धार्मिक बहस छिड़ गई है, जब Asim Munir पर शिया समुदाय के प्रति कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगा। यह मामला उस समय सामने आया जब रावलपिंडी स्थित GHQ में हुई एक अहम बैठक के बाद शिया धर्मगुरु Agha Shifa Najafi ने खुलकर बयान दिया। उनके मुताबिक, बैठक में देश की सुरक्षा और Iran से जुड़े हालात पर चर्चा हुई, लेकिन बातचीत के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया।
‘ईरान चले जाओ’ बयान से बढ़ा विवाद
अल्लामा आगा शिफा नजफी के अनुसार, Asim Munir ने नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा कि अगर शिया समुदाय को ईरान से इतनी मोहब्बत है, तो वे वहीं चले जाएं। यह बयान उस समय आया जब Ali Khamenei को लेकर पाकिस्तान के कुछ हिस्सों, खासकर Gilgit-Baltistan और Islamabad में विरोध प्रदर्शन हुए थे। इन प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं भी सामने आई थीं।
शिया धर्मगुरुओं ने रखा अपना पक्ष
अल्लामा नजफी ने बताया कि उन्होंने बैठक के दौरान सेना प्रमुख को याद दिलाया कि पाकिस्तान की सेना में बड़ी संख्या में शिया अधिकारी भी सेवाएं दे रहे हैं और उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस्लामाबाद में हुए टकराव के दौरान प्रदर्शनकारी किसी के नियंत्रण में नहीं थे और स्थानीय प्रशासन भी इस बात को स्वीकार कर चुका है। उनके मुताबिक, इस पर Asim Munir का रवैया कुछ नरम हुआ, लेकिन ‘ईरान चले जाओ’ जैसी टिप्पणी ने माहौल को और खराब कर दिया।
बयान के बाद बढ़ी सियासी और धार्मिक हलचल
इस खुलासे के बाद Pakistan में राजनीतिक और धार्मिक हलचल तेज हो गई है। शिया समुदाय के कई नेताओं ने इस बयान पर नाराज़गी जताई है और इसे देश की एकता के खिलाफ बताया है। वहीं, अभी तक पाकिस्तानी सेना की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले दिनों में और गहर सकता है और देश के अंदर सांप्रदायिक तनाव को बढ़ा सकता है।
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