पश्चिम एशिया में ईरान को लेकर बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के तेल कारोबार पर सीधा असर डालते हुए चीन में स्थित एक बड़ी रिफाइनरी और कई जहाजों पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस फैसले का मकसद ईरान की तेल से होने वाली कमाई को कम करना बताया जा रहा है, ताकि उसकी आर्थिक और सैन्य गतिविधियों पर नियंत्रण लगाया जा सके। यह कदम ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा बाजार पहले से ही अस्थिर स्थिति में है।
चीन की बड़ी रिफाइनरी पर कार्रवाई से बढ़ी हलचल
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के ‘ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल’ ने चीन की कंपनी हेंगली पेट्रोकेमिकल (डालियान) रिफाइनरी कंपनी लिमिटेड को प्रतिबंध सूची में डाल दिया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कंपनी ईरान से कच्चा तेल खरीदने वाली सबसे बड़ी निजी रिफाइनरियों में से एक है। इस रिफाइनरी पर आरोप है कि यह ईरान के तेल व्यापार को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देती रही है, जिससे वहां की सरकार को अरबों डॉलर की आय मिलती है। इस कार्रवाई के बाद चीन और ईरान दोनों की ऊर्जा नीतियों पर सवाल उठने लगे हैं।
40 जहाजों पर भी बैन
अमेरिका ने सिर्फ एक कंपनी पर ही नहीं बल्कि ईरान के तेल नेटवर्क पर भी बड़ा हमला किया है। रिपोर्ट के अनुसार करीब 40 जहाजों और शिपिंग कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया गया है, जो ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों को अलग-अलग देशों तक पहुंचाने का काम करते थे। इन जहाजों को ईरान का “छिपा हुआ शिपिंग नेटवर्क” यानी शैडो फ्लीट कहा जाता है। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि इसी नेटवर्क के जरिए ईरान अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद तेल बेचकर बड़ी कमाई करता रहा है।
ट्रंप के निर्देश पर आगे भी सख्ती की चेतावनी
अमेरिकी प्रशासन ने साफ संकेत दिए हैं कि यह कार्रवाई सिर्फ शुरुआत है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश के बाद यह कदम उठाया गया है और आगे भी ऐसे देशों, कंपनियों और जहाजों पर कार्रवाई जारी रहेगी जो ईरान के तेल व्यापार में मदद करते हैं। अमेरिका का कहना है कि जो भी व्यक्ति या संस्था इस नेटवर्क से जुड़ेगी, उस पर भी सख्त आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाएंगे। इन प्रतिबंधों के तहत संपत्ति फ्रीज, व्यापार बंद और अमेरिकी बाजार से बाहर किए जाने जैसे कदम शामिल होते हैं, जिससे प्रभावित कंपनियों को बड़ा नुकसान हो सकता है।
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