अगर आप सोचते हैं कि WhatsApp पर किसी को ठगने के बाद सिर्फ नंबर बदल लेने से आप बच जाएंगे, तो अब आपकी खैर नहीं। भारत सरकार ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे घिनौने अपराधों पर लगाम लगाने के लिए अब तक का सबसे घातक ब्रह्मास्त्र चला दिया है। गृह मंत्रालय (MHA) के अधीन काम करने वाले भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने WhatsApp को सख्त आदेश दिए हैं कि अब अपराधियों का केवल अकाउंट नहीं, बल्कि उनका पूरा डिवाइस ही ब्लॉक किया जाए। इस फैसले के बाद अब स्कैमर्स के महंगे स्मार्टफोन भी लोहे के टुकड़े के समान हो जाएंगे।
अब सिम बदलना भी पड़ेगा भारी
अब तक डिजिटल अरेस्ट के मामलों में अपराधी एक नंबर ब्लॉक होने पर तुरंत दूसरी फर्जी सिम का उपयोग कर नया WhatsApp अकाउंट बना लेते थे। लेकिन सरकार ने अब इस लूपहोल को हमेशा के लिए बंद करने का मन बना लिया है। नए निर्देशों के अनुसार, WhatsApp को अब IMEI (International Mobile Equipment Identity) यानी डिवाइस ID को ट्रैक और ब्लॉक करने की तकनीक विकसित करने को कहा गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर किसी एक मोबाइल फोन से ठगी की कोशिश की गई, तो WhatsApp उस पूरे डिवाइस को ही ब्लैकलिस्ट कर देगा। इसके बाद उस मोबाइल फोन में आप दुनिया की कोई भी सिम डाल लें, उस पर WhatsApp कभी नहीं चलेगा। सरकार ने कंपनी को इस मैकेनिज्म को लागू करने के लिए 45 दिनों का अल्टीमेटम दिया है, ताकि भविष्य में ‘डिजिटल अरेस्ट’ की घटनाओं को शून्य किया जा सके।
‘डिजिटल अरेस्ट’ का मायाजाल
पिछले कुछ महीनों में देश में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामलों में बाढ़ सी आ गई है। ठग खुद को CBI, NCB या पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल करते हैं और उन्हें ड्रग्स या मनी लॉन्ड्रिंग के फर्जी केस में फंसाने की धमकी देकर घंटों तक कैमरे के सामने बैठने को मजबूर करते हैं। इस डर का फायदा उठाकर वे लाखों-करोड़ों रुपये ऐंठ लेते हैं। सरकार ने इस समस्या की जड़ पर प्रहार करते हुए अब न केवल डिवाइस ब्लॉकिंग, बल्कि SIM बाइंडिंग जैसे फीचर्स पर भी जोर दिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति बिना अपनी असली पहचान और एक्टिव सिम के WhatsApp का इस्तेमाल न कर सके। इसके अलावा, अब संदिग्ध कॉल आने पर यूजर्स को स्क्रीन पर तत्काल ‘रेड फ्लैग’ या चेतावनी संदेश भी दिखाई दे सकता है, जो उन्हें ठगी से सचेत करेगा।
डेटा रिटेंशन और अपराधियों की कुंडली: 180 दिन का चक्रव्यूह
सरकार ने केवल तकनीकी बदलाव ही नहीं किए हैं, बल्कि कानूनी शिकंजा भी कस दिया है। आईटी (IT) नियमों के तहत अब WhatsApp को उन सभी अकाउंट्स का डेटा कम से कम 180 दिनों (6 महीने) तक सुरक्षित रखना होगा, जिन्हें संदिग्ध गतिविधियों के कारण डिलीट या बैन किया गया है। अक्सर अपराधी अपराध करने के बाद अपना अकाउंट डिलीट कर देते हैं जिससे सबूत मिट जाते थे, लेकिन अब जांच एजेंसियां इस पुराने डेटा की मदद से अपराधियों के ठिकाने और उनके नेटवर्क तक आसानी से पहुँच सकेंगी। इसके साथ ही, फर्जी APK फाइल्स और थर्ड-पार्टी ऐप्स के जरिए होने वाले फिशिंग अटैक्स को रोकने के लिए भी एक विशेष सुरक्षा कवच तैयार किया जा रहा है, जिससे इंटरनेट बैंकिंग और निजी डेटा चोरी होने का खतरा कम हो जाएगा।
आंकड़ों की जुबानी: अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई का सच
इस मिशन के तहत सरकार ने जो आंकड़े पेश किए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। साइबर सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए अब तक 9.42 लाख से अधिक फर्जी सिम कार्ड बंद किए जा चुके हैं। इतना ही नहीं, करीब 2.63 लाख मोबाइल हैंडसेट (IMEI) को हमेशा के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। WhatsApp पर भी गाज गिरी है, जहाँ 83,000 से ज्यादा संदिग्ध अकाउंट्स को पिछले कुछ समय में हटाया गया है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि डिजिटल सुरक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। आम नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी अनजान वीडियो कॉल से न डरें, क्योंकि कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई प्रावधान नहीं है। यदि आपके साथ ऐसी कोई भी घटना होती है, तो बिना डरे तुरंत नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें।
Read More-जंग के बीच होर्मुज स्ट्रेट पार करने वाले हैं 2 भारतीय गैस टैंकर, क्या खत्म होगी LPG की कीमत?
