राइजिंग स्टार्स एशिया कप 2025 के सेमीफाइनल में भारत A और बांग्लादेश A के बीच शुक्रवार को रोमांच चरम पर था। दोनों टीमों का स्कोर बराबर होने के बाद मुकाबला सुपर ओवर तक जा पहुंचा, लेकिन असली कहानी यहीं से शुरू हुई। पूरे टूर्नामेंट में तूफानी बल्लेबाजी दिखाने वाले वैभव सूर्यवंशी को अचानक सुपर ओवर में मौका न देना क्रिकेट फैंस के बीच बड़ा रहस्य बन गया। टीम मैनेजमेंट ने उनकी जगह जितेश शर्मा, आशुतोष शर्मा और रमनदीप सिंह को भेजा और इसी फैसले ने मैच की दिशा बदल दी।
सुपर ओवर में ढह गई उम्मीदें, फैंस के निशाने पर आया निर्णय
सुपर ओवर की पहली ही दो गेंदों में भारतीय बल्लेबाज बिना रन बनाए पवेलियन लौट गए और टीम दबाव में ढहती दिखी। दूसरी ओर वैभव सूर्यवंशी ड्रेसिंग रूम की बालकनी से यह सब देखते रहे, उनका चेहरा उन सवालों का जवाब दे रहा था जिन्हें शायद वो खुद भी नहीं बोल पाए। सोशल मीडिया पर फैंस ने टीम मैनेजमेंट पर निशाना साधते हुए पूछा—“जब सबसे बड़े हिटर बेंच पर हैं, तो सुपर ओवर कौन खेलता है?” कई विशेषज्ञों ने भी इस फैसले को मैच का निर्णायक मोड़ बताया।
वैभव की खामोशी में छुपा मलाल
मैच के बाद वैभव सूर्यवंशी भले ही कुछ बोले नहीं, लेकिन कैमरे ने उनके चेहरे से झलकती कसक को साफ कैद किया। टूर्नामेंट में लगातार शानदार प्रदर्शन करने वाले वैभव को पता था कि सुपर ओवर जैसे मौके उनके जैसे पावर हिटर के लिए ही बने होते हैं। मैदान पर खड़े न होने का मलाल उनके चेहरे की मायूसी में साफ पढ़ा जा सकता था। फैंस का मानना है कि अगर उन्हें भेजा जाता तो मैच का नतीजा कुछ और हो सकता था।
कप्तान जितेश शर्मा ने बताया फैसला किस आधार पर लिया गया
पोस्ट-मैच प्रेस कॉन्फ्रेंस में कप्तान जितेश शर्मा ने इस फैसले पर अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने कहा कि टीम ने रणनीति के तहत वही खिलाड़ियों को भेजा जो उन्हें उस समय सही लगे। जितेश ने कहा, “मैं जिम्मेदारी लेता हूं। यह हार नहीं, सीख है। मैच में कई युवा खिलाड़ी ऐसे हैं जो आने वाले समय में भारत के लिए बड़े टूर्नामेंट जीत सकते हैं।” उन्होंने वैभव का नाम लिए बिना यह भी स्वीकार किया कि कुछ फैसले दबाव में अलग दिख सकते हैं, लेकिन टीम ने पूरे मैच में बहादुरी से खेला।
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