आईपीएल में पंजाब किंग्स के लिए खेलने वाले ऑलराउंडर शशांक सिंह (Shashank Singh) और उनके पिता, आईपीएस अधिकारी शैलेश सिंह कानूनी विवाद में घिर गए हैं। भोपाल के रातीबड़ थाना क्षेत्र में एक घरेलू कुक की शिकायत के आधार पर दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि खाना पसंद नहीं आने के बाद कुक के साथ मारपीट की गई, गाली-गलौज की गई और उसके साथ जबरदस्ती काम कराया गया। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल मामले में किसी भी पक्ष की ओर से अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है और जांच जारी है।
कुक ने लगाए मारपीट और जबरन काम कराने के आरोप
शिकायतकर्ता विपेंद्र सिंह तोमर का कहना है कि उन्हें रीवा से भोपाल काम के लिए बुलाया गया था। उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि खाना बनाने की नौकरी के साथ रहने और खाने की सुविधा मिलेगी तथा भविष्य में सरकारी नौकरी दिलाने में भी मदद की जाएगी। आरोप है कि काम शुरू करने के कुछ ही समय बाद उन पर लगातार दबाव बनाया जाने लगा। शिकायत के अनुसार, एक दिन परिवार को उनके हाथ का बना खाना पसंद नहीं आया, जिसके बाद उनके साथ मारपीट की गई और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया। कुक का यह भी आरोप है कि उनका मोबाइल फोन अपने पास रख लिया गया और विरोध करने के बावजूद उनसे काम कराया जाता रहा। उन्होंने दावा किया कि डर के कारण उन्होंने खुद को कमरे में बंद कर लिया था, लेकिन बाद में वहां भी उनके साथ मारपीट की गई, जिससे उन्हें चोटें आईं।
पुलिस ने दर्ज किया केस, जांच जारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए रातीबड़ पुलिस ने Shashank Singh , उनके पिता शैलेश सिंह और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जा रही है। जांच के दौरान दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे और उपलब्ध सबूतों की भी जांच होगी। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल किसी भी आरोपी को दोषी या निर्दोष घोषित नहीं किया गया है।
जांच के नतीजे का इंतजार
यह मामला सामने आने के बाद खेल जगत और सोशल मीडिया पर भी इसकी चर्चा तेज हो गई है। शशांक सिंह (Shashank Singh) आईपीएल में अपने प्रदर्शन के कारण चर्चा में रहे हैं, लेकिन अब उनका नाम एक कानूनी विवाद से जुड़ गया है। दूसरी ओर, शिकायतकर्ता अपने आरोपों पर कायम है और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। वहीं, पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों और साक्ष्यों की जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी। ऐसे मामलों में जांच पूरी होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं माना जाता। अब सभी की नजर पुलिस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हुई है।
