UP Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर पिछले कुछ समय से कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं। सबसे बड़ा सवाल यह था कि फरवरी 2027 में होने वाली जनगणना के कारण क्या विधानसभा चुनाव आगे बढ़ सकते हैं। अब चुनाव आयोग के ताजा संकेतों ने इस सस्पेंस को लगभग खत्म कर दिया है। आयोग का कहना है कि चुनाव कराना एक संवैधानिक जिम्मेदारी है, जबकि जनगणना एक कानूनी प्रक्रिया है। ऐसे में दोनों कार्य अपने-अपने समय पर पूरे किए जा सकते हैं। यही वजह है कि यूपी विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव कराने की तैयारी पर जोर दिया जा रहा है। राजनीतिक दलों और मतदाताओं के लिए यह संदेश महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे चुनावी कार्यक्रम को लेकर बनी अनिश्चितता काफी हद तक दूर हो गई है।
तय समय पर चुनाव की ओर बढ़ रहा उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 22 मई 2027 तक है। इसके अलावा पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और अन्य राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल भी अगले साल समाप्त होने वाला है। आमतौर पर इन राज्यों में फरवरी और मार्च के दौरान चुनाव कराए जाते हैं। इस बार स्थिति इसलिए अलग मानी जा रही थी क्योंकि 1 फरवरी से 28 फरवरी 2027 तक देशभर में जनगणना का कार्यक्रम प्रस्तावित है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा थी कि चुनाव और जनगणना एक साथ होने से चुनाव की तारीखों में बदलाव हो सकता है। हालांकि चुनाव आयोग के रुख से साफ संकेत मिला है कि संवैधानिक प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाएगी और विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने से पहले ही मतदान संपन्न कराने का प्रयास होगा। इससे चुनावी तैयारियों में जुटी पार्टियों को भी अपनी रणनीति तय करने में स्पष्टता मिलेगी।
डिजिटल वोटिंग पर भी आयोग ने दिया बड़ा जवाब
नई दिल्ली में आयोजित चुनाव आयोग के मीडिया सम्मेलन में डिजिटल और ऑनलाइन वोटिंग को लेकर चल रही अटकलों पर भी स्थिति स्पष्ट कर दी गई। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि फिलहाल चुनावी प्रक्रिया संविधान और मौजूदा कानूनों के अनुसार ही संचालित की जा रही है। उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष के दौरान चुनाव आयोग को विभिन्न अदालतों में सैकड़ों मामलों का सामना करना पड़ा, लेकिन अधिकांश मामलों में आयोग के फैसलों को सही माना गया। आयोग का कहना है कि मतदाताओं का चुनावी व्यवस्था पर भरोसा लगातार मजबूत हुआ है, जिसका प्रमाण हाल के चुनावों में रिकॉर्ड मतदान के रूप में देखने को मिला। आयोग ने यह भी दोहराया कि मतदाता सूची से लेकर चुनाव संचालन तक सभी प्रक्रियाएं निर्धारित नियमों और कानूनी प्रावधानों के तहत ही पूरी की जाती हैं।
यूपी की तीन खाली सीटों पर नहीं होंगे उपचुनाव
उत्तर प्रदेश की तीन विधानसभा सीटों—मऊ की घोसी, सोनभद्र की दुद्धी और बरेली की फरीदपुर—पर उपचुनाव नहीं कराए जाएंगे। ये सीटें संबंधित विधायकों के निधन के बाद खाली हुई थीं। विधानसभा सचिवालय की ओर से रिक्तियों की सूचना काफी पहले चुनाव आयोग को भेज दी गई थी, लेकिन आयोग ने उपचुनाव घोषित नहीं किया। आयोग का तर्क है कि विधानसभा का शेष कार्यकाल अब एक वर्ष से कम बचा है, इसलिए उपचुनाव कराना व्यावहारिक नहीं माना गया। आयोग के अनुसार जब सीटें खाली हुई थीं, उस समय विशेष मतदाता पुनरीक्षण अभियान चल रहा था और उसके बाद अन्य राज्यों के चुनावों में व्यस्तता रही। अब चूंकि अगले विधानसभा चुनाव ज्यादा दूर नहीं हैं, इसलिए इन सीटों पर सीधे 2027 के आम विधानसभा चुनाव के दौरान ही मतदान कराया जाएगा। इस फैसले से प्रदेश की सियासत में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं और सभी दल आगामी चुनावी मुकाबले की तैयारी में जुट गए हैं।
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