Sunday, December 7, 2025
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सवाल पूछा तो अचानक ‘भौं-भौं’ करने लगीं रेणुका चौधरी! संसद में कुत्ता विवाद पर ऐसा जवाब देखकर हर कोई दंग

कुत्ता विवाद पर सांसद रेणुका चौधरी ने संसद में चौंकाने वाला जवाब दिया। विशेषाधिकार हनन नोटिस पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने ‘भौं-भौं’ कर प्रतिक्रिया दी। जानें पूरा विवाद, वीडियो और राजनीतिक हलचल की पूरी कहानी।

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शीतकालीन सत्र के पहले दिन ही संसद परिसर में एक अनोखी घटना ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रेणुका चौधरी अपनी कार में एक छोटे पिल्ले को लेकर संसद पहुंच गईं। यह दृश्य देखकर मौजूद सुरक्षा कर्मियों से लेकर मीडिया तक सभी हैरान रह गए। कुछ ही मिनटों में इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और इसे लेकर बहस शुरू हो गई। सवाल उठे कि आखिर संसद जैसी संवेदनशील जगह पर इस तरह जानवर को लेकर आना नियमों के खिलाफ है या नहीं।

इस घटना ने राजनीति में हलचल बढ़ा दी, जहां विपक्ष और सत्ता पक्ष के नेताओं के बीच तकरार जैसी स्थिति बनती दिखी। कई लोगों ने इसे ‘सुरक्षा नियमों की अनदेखी’ बताया तो कुछ ने इसे ‘अनावश्यक विवाद’ कहा।

राजनीतिक विवाद के बीच सामने आया रेणुका चौधरी का बयान

वायरल वीडियो विवाद के बाद मीडिया ने जब रेणुका चौधरी से इस मसले पर सवाल पूछे, तो उनकी प्रतिक्रिया ने सबको चौंका दिया। पत्रकार ने पूछा कि यदि बीजेपी इस मामले में विशेषाधिकार हनन की नोटिस लाती है, तो आप क्या करेंगी? इसके जवाब में रेणुका ने पहले मुस्कुराकर ‘भौं-भौं’ कहा और फिर सामान्य अंदाज में बोलीं, “आएगा तो देखेंगे, हम डरने वाले नहीं हैं। जो सच है, वही कहेंगे।”

उनके इस बयान का क्लिप भी तेजी से वायरल हो गया। ‘भौं-भौं’ वाली प्रतिक्रिया सोशल मीडिया में मीम्स का विषय बन गई। जहां कुछ लोगों ने इसे ‘सेंस ऑफ ह्यूमर’ बताया, वहीं कुछ ने कहा कि संसद से जुड़ी गंभीर बात पर ऐसा जवाब देना ठीक नहीं।

क्यों बढ़ा मामला? क्या वास्तव में नियम टूटे?

सूत्रों के मुताबिक, संसद परिसर में जानवरों को लेकर प्रवेश करने पर कुछ प्रतिबंध हैं, खासकर सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर। हालांकि रेणुका चौधरी ने दावा किया कि वे पिल्ले को अंदर नहीं ले गईं, बल्कि कार में रखा था और वह एक बचाया हुआ पालतू कुत्ता है, जिसकी देखभाल की जिम्मेदारी उन्होंने ली है।

इसके बावजूद विपक्षी दलों ने इस घटना को मुद्दा बनाते हुए तर्क दिया कि सांसदों को आदर्श उदाहरण स्थापित करना चाहिए। कुछ नेताओं ने इसे संसद की गरिमा से जोड़कर गंभीर टिप्पणी की, जबकि कई लोगों ने कहा कि मामला अनावश्यक रूप से बढ़ाया जा रहा है, क्योंकि पिल्ला संसद भवन के भीतर नहीं गया था।

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