महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार के निधन ने एक बड़ा शून्य पैदा कर दिया है। उनके अचानक निधन के बाद राज्य और पार्टी दोनों में शोक की लहर है। इसी बीच, एनसीपी के नेता और मंत्री नरहरी झिरवाल ने कहा कि सुनेत्रा पवार को डिप्टी CM बनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार, यह सिर्फ एक राजनीतिक निर्णय नहीं होगा बल्कि दिवंगत अजित पवार को श्रद्धांजलि देने का भी तरीका होगा।
झिरवाल ने बताया कि सुनेत्रा पवार वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं और उनके अनुभव और राजनीतिक समझ उन्हें इस पद के लिए योग्य बनाती है। उन्होंने कहा कि इस कदम से न केवल पवार परिवार की राजनीतिक विरासत को मजबूती मिलेगी बल्कि पार्टी के अंदर नेतृत्व संतुलन बनाए रखने में भी मदद होगी।
डिप्टी CM पद से पवार परिवार की राजनीतिक छवि को मिलेगी मजबूती
पवार परिवार महाराष्ट्र की राजनीति में दशकों से महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। अजित पवार की भूमिका पार्टी और राज्य दोनों में अहम रही है। उनके निधन के बाद, सुनेत्रा पवार को डिप्टी CM बनाने की मांग इस बात को दर्शाती है कि पार्टी परिवार की राजनीतिक विरासत को बनाए रखना चाहती है। यह कदम सिर्फ श्रद्धांजलि देने का नहीं बल्कि पार्टी की रणनीति और नेतृत्व संतुलन बनाए रखने का भी तरीका हो सकता है। सुनेत्रा पवार डिप्टी CM बनेंगी तो यह महाराष्ट्र की राजनीति में पवार परिवार के प्रभाव को और भी मजबूत करेगा।
अंतिम संस्कार में शामिल हुए वरिष्ठ नेता
गुरुवार, 29 जनवरी को बारामती स्थित विद्या प्रतिष्ठान में अजित पवार का अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। उनके बेटों पार्थ और जय पवार ने मुखाग्नि दी। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और डिप्टी CM एकनाथ शिंदे सहित कई वरिष्ठ नेता भी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर नेताओं ने अजित पवार को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके योगदान को याद किया। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, इस भव्य अंतिम संस्कार ने महाराष्ट्र की राजनीति में पवार परिवार की अहमियत को और स्पष्ट कर दिया।
क्या सुनेत्रा पवार बनेंगी डिप्टी CM?
एनसीपी के वरिष्ठ नेताओं के बीच चर्चा शुरू हो चुकी है कि सुनेत्रा पवार को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए। नरहरी झिरवाल ने कहा कि वे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से इस विषय में चर्चा करेंगे और इस दिशा में उचित निर्णय लेने का अनुरोध करेंगे।
अगर सुनेत्रा पवार डिप्टी CM बनती हैं, तो यह न केवल पवार परिवार की राजनीतिक विरासत को जारी रखने का प्रतीक होगा बल्कि राज्य में पार्टी के अंदर नेतृत्व संतुलन बनाए रखने और सामाजिक सम्मान का संदेश भी देगा। आने वाले हफ्तों में इस मुद्दे पर हलचल बढ़ने की संभावना है।
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