Monday, December 8, 2025
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लप्पू-गप्पू और पप्पू को मिलेगी सजा? 14 नवंबर को जनता सुनाएगी फैसला, तेजस्वी पर बरसे अश्विनी चौबे

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बिहार में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के बाद सियासी माहौल पूरी तरह गरम हो गया है. नेताओं के बयान और आरोप-प्रत्यारोप ने माहौल को और तीखा बना दिया है. इसी कड़ी में बीजेपी के वरिष्ठ नेता अश्विनी कुमार चौबे ने महागठबंधन पर सीधा निशाना साधा है.

पटना में पत्रकारों से बातचीत करते हुए चौबे ने कहा कि तेजस्वी यादव और उनकी पार्टी लगातार जनता को गुमराह कर रही है. उन्होंने कहा, “महिला आरक्षण को लागू करने का काम हमने किया, फिर भी हमें कटघरे में खड़ा किया जा रहा है. क्या तेजस्वी सोचते हैं कि हम उनसे अनुमति लेकर विकास करेंगे?”
चौबे ने यह भी कहा कि जो लोग कभी जंगलराज की पहचान थे, वही अब सुशासन देने की बातें कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जनता इस बार भ्रम में नहीं पड़ेगी, बल्कि जवाब देगी उन सबको जिन्होंने बिहार की साख पर दाग लगाया.

“लप्पू-गप्पू-पप्पू को जनता देगी जवाब”

पत्रकारों के सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए अश्विनी चौबे ने महागठबंधन के नेताओं को लप्पू, गप्पू और पप्पू कहकर तंज कसा. उन्होंने कहा, “14 नवंबर को बिहार की जनता इन सभी को सज़ा देने जा रही है. जनता सब जानती है कि किसने बिहार को लूटा और किसने विकास का रास्ता दिखाया.”
उन्होंने आगे कहा कि महागठबंधन के लोगों ने हमेशा झूठ और भ्रष्टाचार की राजनीति की है. गरीब, दलित और पिछड़े वर्ग के लोगों के हक़ को छीना गया. “अब जनता चुप नहीं रहेगी, इस बार जवाब मतपेटी में दिया जाएगा,” चौबे ने जोड़ा.
बीजेपी नेता ने कहा कि तेजस्वी यादव और उनके सहयोगी लोग सिर्फ नारों और वादों की राजनीति करते हैं, जबकि बीजेपी ने सुशासन और विकास के वादे पूरे किए हैं. उन्होंने दावा किया कि इस बार बिहार की जनता ‘कुशासन’ नहीं बल्कि ‘सुशासन’ को वोट देगी.

जंगलराज बनाम सुशासन

जैसे-जैसे चुनावी तारीख़ें नज़दीक आ रही हैं, बिहार में जंगलराज बनाम सुशासन की बहस एक बार फिर ज़ोर पकड़ चुकी है. तेजस्वी यादव जहां बीजेपी सरकार पर बेरोजगारी और महंगाई के मुद्दे उठाकर हमला कर रहे हैं, वहीं बीजेपी नेता सुशासन और विकास के रिकॉर्ड के सहारे जनता के बीच जा रहे हैं.

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पहले चरण के मतदान के बाद दोनों दलों में बेचैनी बढ़ी है. यही कारण है कि अब हर नेता अपने-अपने समर्थकों को साधने में जुटा है.

14 नवंबर को होने वाला अगला चरण इस सियासी टकराव का असली इम्तिहान होगा. जनता यह तय करेगी कि बिहार को कौन-सा रास्ता चाहिए—विकास और स्थिरता का या पुराने जंगलराज की वापसी का.

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