समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव गुरुवार को कोलकाता पहुंचे, जहां एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। अखिलेश यादव ने कहा कि उन्होंने कुछ ऐसी तस्वीरें देखी हैं और खुद भी साझा की हैं, जो चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े करती हैं। उनके मुताबिक, पहले उत्तर प्रदेश में उपचुनाव के दौरान मतदाताओं को रोकने की घटनाएं सामने आई थीं, लेकिन पश्चिम बंगाल में इससे भी ज्यादा चिंताजनक हालात देखने को मिले हैं।
“महिलाओं के नेतृत्व से परेशानी” वाला बयान
अखिलेश यादव ने अपने बयान में यह भी कहा कि कुछ राजनीतिक ताकतें महिलाओं के नेतृत्व को स्वीकार नहीं कर पा रही हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री का जिक्र करते हुए कहा कि वह आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती हैं और यही बात उनके विरोधियों को खटकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ दलों की सोच अब भी सामंती है, जहां महिलाओं को आगे बढ़ते देखना उन्हें मंजूर नहीं। इसी दौरान उन्होंने दिल्ली की राजनीति का उदाहरण देते हुए यह भी कहा कि कुछ जगहों पर महिला नेतृत्व को सीमित दायरे में रखने की कोशिश की जा रही है।
चुनावी प्रक्रिया पर उठाए सवाल
सपा प्रमुख ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में लोगों ने अपनी मर्जी से कम और दबाव में ज्यादा वोट डाले हैं। उन्होंने कुछ तस्वीरों का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव एक “मल्टी लेयर सिस्टम” की तरह संचालित हुआ, जहां कई स्तरों पर हस्तक्षेप की आशंका दिखाई देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि संस्थाओं का दुरुपयोग हो रहा है और चुनाव को प्रभावित करने के लिए बाहरी ताकतों का इस्तेमाल किया जा रहा है। अखिलेश ने यह भी कहा कि बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों से लोगों को लाया गया, जिससे स्थानीय माहौल प्रभावित हुआ।
हत्या मामले पर भी उठाए गंभीर सवाल
कोलकाता दौरे के दौरान अखिलेश यादव ने हाल ही में सामने आए एक हत्या के मामले को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल किया कि जब इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात थे, तो ऐसी घटनाएं कैसे हो गईं और इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय स्तर पर सुरक्षा का समानांतर ढांचा खड़ा किया गया, लेकिन इसके बावजूद कानून-व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले चुनावों में भी इसी तरह की रणनीतियां अपनाई जा सकती हैं, जिससे राजनीतिक माहौल और अधिक गरमाने की संभावना है।
