केंद्रीय बजट 2026 पेश होते ही शेयर बाजार में ऐसा भूचाल आया, जिसकी उम्मीद बहुत कम निवेशकों को थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के भाषण के दौरान जैसे ही फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) ट्रेड पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने का ऐलान हुआ, बाजार में तेज बिकवाली शुरू हो गई। देखते ही देखते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दिन के निचले स्तर तक फिसल गए। बीएसई सेंसेक्स करीब 1500 अंक टूटकर 81,129 के स्तर तक पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 में 356 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 24,965 के आसपास ट्रेड करता नजर आया। बजट से पहले जहां निवेशकों को राहत की उम्मीद थी, वहीं टैक्स बढ़ाने की घोषणा ने बाजार की दिशा ही पलट दी। बड़े निवेशकों से लेकर छोटे रिटेल ट्रेडर्स तक, सभी में घबराहट साफ दिखाई दी और भारी संख्या में लोग मुनाफावसूली और नुकसान से बचने के लिए शेयर बेचते नजर आए।
F&O पर STT बढ़ते ही क्यों टूट गया शेयर बाजार
बजट भाषण में वित्त मंत्री ने साफ किया कि फ्यूचर ट्रेड पर STT को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत किया जाएगा। इसके अलावा ऑप्शंस प्रीमियम पर लगने वाला STT भी 0.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा गया। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, यह फैसला सीधे तौर पर डेरिवेटिव ट्रेडिंग को महंगा बनाता है। भारत में बड़ी संख्या में ट्रेडर्स F&O सेगमेंट में सक्रिय हैं और यही सेगमेंट बाजार के वॉल्यूम को सहारा देता है। टैक्स बढ़ने से ट्रेडिंग कॉस्ट बढ़ेगी, जिससे शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स और प्रोफेशनल ट्रेडिंग फर्म्स की कमाई पर असर पड़ेगा। यही वजह रही कि बजट के दौरान ही F&O से जुड़े स्टॉक्स में तेज बिकवाली देखने को मिली। बैंकिंग, आईटी और कैपिटल मार्केट से जुड़े शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव रहा। निवेशकों को यह डर सताने लगा कि आने वाले दिनों में ट्रेडिंग वॉल्यूम घट सकता है, जिसका असर पूरे शेयर बाजार की चाल पर पड़ेगा।
मिडकैप और स्मॉलकैप में ज्यादा दर्द, निवेशक सबसे ज्यादा परेशान
मुख्य सूचकांकों के साथ-साथ ब्रॉडर मार्केट में भी गिरावट और ज्यादा गहरी रही। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स करीब 2.7 प्रतिशत टूट गया, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में लगभग 3.4 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई। इसका सीधा मतलब है कि छोटे और मझोले शेयरों में निवेश करने वालों को ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। जानकारों के अनुसार, जब भी बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक पहले मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों से पैसा निकालते हैं, क्योंकि इन्हें ज्यादा जोखिम वाला माना जाता है। बजट के बाद पैदा हुई इस अनिश्चितता ने भी वही किया। कई ऐसे शेयर, जो पिछले कुछ महीनों से लगातार चढ़ रहे थे, एक ही दिन में कई प्रतिशत तक टूट गए। रिटेल निवेशक, जो हाल के समय में बाजार में बड़ी संख्या में जुड़े थे, इस अचानक आई गिरावट से सबसे ज्यादा घबरा गए।
आगे बाजार का रुख क्या होगा
बजट के बाद आई इस तेज गिरावट ने निवेशकों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि शॉर्ट टर्म में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, क्योंकि F&O पर टैक्स बढ़ने का असर धीरे-धीरे सामने आएगा। हालांकि कुछ जानकार यह भी कह रहे हैं कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट एक मौके की तरह हो सकती है, बशर्ते वे मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में निवेश करें। सरकार की मंशा टैक्स के जरिए राजस्व बढ़ाने की है, लेकिन बाजार इस तरह के फैसलों पर तुरंत प्रतिक्रिया देता है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या सरकार बाजार को स्थिर करने के लिए कोई संकेत देती है या नहीं। फिलहाल इतना तय है कि बजट 2026 के बाद शेयर बाजार ने साफ कर दिया है कि टैक्स से जुड़ी छोटी-सी घोषणा भी निवेशकों की भावना को झकझोर सकती है और एक दिन में ही करोड़ों रुपये की वैल्यू साफ हो सकती है।
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