बिहार के मोतीहारी जिले में इस साल जुलाई में एक अजीब और हैरान करने वाली घटना घटी। गुंजा नाम की महिला अचानक गायब हो गई और उसके पति रंजीत कुमार पर उसकी हत्या का गंभीर आरोप लगा दिया गया। पुलिस ने बिना पूरी जांच किए रंजीत को गिरफ्तार कर लिया और उसे जेल भेज दिया। परिवार और गांव वालों ने भी रंजीत पर दबाव डालते हुए आरोप लगाया कि उसने अपनी पत्नी को दहेज के कारण मार दिया और उसकी लाश कहीं छुपा दी। पुलिस ने इस केस में चार्जशीट भी दाखिल कर दी, जबकि असल में गुंजा जिंदा थी।
नोएडा में अचानक जिंदा महिला
चार महीने के बाद 24 नवंबर 2025 को नोएडा में एक महिला नजर आई, जो पहले ‘मरी हुई’ मानी जा रही थी। सलवार-सूट पहने, हाथ में मोबाइल लिए और हंसती-मुस्कुराती सड़क पर चलती हुई गुंजा को देखकर लोग हैरान रह गए। पुलिस ने भी उसे हिरासत में लिया। वीडियो और तस्वीरों में दिख रहा था कि महिला पूरी तरह स्वस्थ और सामान्य जीवन जी रही थी। यह घटना रंजीत के लिए राहत की खबर साबित हुई, क्योंकि चार महीने तक वह बेगुनाह होने के बावजूद जेल में बंद रहा।
पुलिस की लापरवाही और गलत कार्रवाई
गुंजा की असलियत सामने आने के बावजूद मोतीहारी पुलिस ने उसका मामला सही तरीके से नहीं देखा। सीसीटीवी फुटेज में साफ दिखाई देता था कि गुंजा अपनी मर्जी से घर से गई थी, और उसका पति रंजीत कमरे में मौजूद था। बावजूद इसके, पुलिस ने रंजीत को अपराधी मानकर चार्जशीट दर्ज कर दी। इस पूरे समय में रंजीत का परिवार मानसिक और आर्थिक रूप से प्रभावित हुआ। मामले ने कानून की प्रक्रिया और पुलिस की जांच पर भी सवाल खड़े कर दिए।
गुंजा की जिंदा वापसी और कानून का उलझा मामला
गुंजा की नोएडा से वापसी ने पूरे मामले को उलझा दिया है। पति के जेल से बाहर आने की राह खुल गई, लेकिन सवाल यह है कि गुंजा और उसके प्रेमी के जिंदा होने के बावजूद पुलिस और कानून इस केस को कैसे निपटाएगी। यह मामला दिखाता है कि बिना सही सबूत और जांच के आरोप कितने खतरनाक साबित हो सकते हैं। अब मोतीहारी पुलिस को खुद अपने कदम सुधारने होंगे और रंजीत की बेगुनाही सुनिश्चित करनी होगी।
