उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले से सामने आए एक वीडियो ने सोशल मीडिया पर नई चर्चा छेड़ दी है। डुमरियागंज ब्लॉक परिसर के पास आयोजित एक भंडारे के दौरान भाजपा से जुड़े नेता लवकुश ओझा श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को प्रसाद के रूप में पूड़ी-सब्जी वितरित कर रहे थे। इसी दौरान जालीदार टोपी पहने एक मुस्लिम बुजुर्ग प्रसाद लेने के लिए पहुंचे। वीडियो में दिखाई देता है कि उन्हें पूड़ियां देने से पहले भाजपा नेता मुस्कुराते हुए कहते हैं कि पहले “जय श्रीराम” और “जय श्रीकृष्ण” बोलिए, उसके बाद प्रसाद मिलेगा। बुजुर्ग ने धीमी आवाज में दोनों धार्मिक नारे लगाए, जिसके बाद उन्हें दो पूड़ियां दे दी गईं। इसके बाद उन्होंने हाथ उठाकर आशीर्वाद जैसा इशारा किया और वहां से आगे बढ़ गए। कुछ ही समय में इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर वायरल हो गया।
कौन हैं वीडियो में दिखाई देने वाले भाजपा नेता?
वायरल वीडियो में नजर आ रहे लवकुश ओझा स्थानीय राजनीति में सक्रिय माने जाते हैं। उनकी पत्नी भनवापुर ब्लॉक की ब्लॉक प्रमुख हैं और लवकुश ओझा उनके प्रतिनिधि के रूप में क्षेत्र में काम करते हैं। इसके अलावा उन्हें डुमरियागंज विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह का करीबी सहयोगी भी बताया जाता है। घटना के बाद उनका नाम सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गया। हालांकि इस मामले में अब तक किसी प्रशासनिक कार्रवाई या आधिकारिक शिकायत की पुष्टि नहीं हुई है। वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय स्तर पर भी लोग इसे लेकर अपनी-अपनी राय रख रहे हैं। फिलहाल यह वीडियो इंटरनेट पर लगातार साझा किया जा रहा है और चर्चा का विषय बना हुआ है।
सोशल मीडिया पर बंटी राय, शुरू हुई नई बहस
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं दो हिस्सों में बंटी दिखाई दे रही हैं। एक वर्ग का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को भोजन या प्रसाद देने से पहले किसी धार्मिक नारे के लिए कहना उचित नहीं है। उनका मानना है कि भंडारा सेवा और समानता का प्रतीक होता है, इसलिए वहां किसी प्रकार की धार्मिक शर्त नहीं होनी चाहिए। वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इस घटना को अलग नजरिए से देख रहे हैं। उनका कहना है कि वीडियो में किसी तरह का विवाद या विरोध दिखाई नहीं देता और मुस्लिम बुजुर्ग ने भी बिना किसी बहस के नारा लगाया तथा प्रसाद लेकर आगे बढ़ गए। ऐसे लोग इसे आपसी सौहार्द और सामान्य बातचीत का हिस्सा बता रहे हैं। इसी वजह से यह वीडियो इंटरनेट पर लगातार बहस का कारण बना हुआ है।
प्रशासन की ओर से फिलहाल नहीं आया कोई आधिकारिक बयान
घटना के वायरल होने के बाद भी जिला प्रशासन या पुलिस की ओर से इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। न ही किसी पक्ष की ओर से औपचारिक शिकायत दर्ज होने की पुष्टि हुई है। ऐसे में फिलहाल यह मामला मुख्य रूप से सोशल मीडिया की चर्चाओं तक सीमित है। विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक और सामाजिक विषयों से जुड़े वीडियो तेजी से वायरल होते हैं, इसलिए ऐसे मामलों में तथ्यों की पुष्टि और जिम्मेदारी के साथ प्रतिक्रिया देना जरूरी होता है। आने वाले समय में यदि प्रशासन या संबंधित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी सामने आती है तो इस मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल सिद्धार्थनगर का यह वीडियो पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग अपने-अपने नजरिए से इसे देख रहे हैं।
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