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ना कार, ना दहेज, ना DJ… दूल्हे ने शादी में किया कुछ ऐसा कि लोग करते रह गए तारीफ

बोकारो में एक दूल्हा बैलगाड़ी पर बारात लेकर पहुंचा और बिना दहेज, बिना डीजे सादगी से शादी की। इस अनोखी शादी ने लोगों का दिल जीत लिया और समाज को सकारात्मक संदेश दिया।

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झारखंड के बोकारो जिले में हुई एक शादी इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। जहां आजकल शादियों में महंगी गाड़ियां, भव्य सजावट और बड़े-बड़े आयोजन देखने को मिलते हैं, वहीं इस शादी में सादगी और परंपरा को सबसे ज्यादा महत्व दिया गया। दूल्हे ने दुल्हन को लाने के लिए किसी लग्जरी कार का इस्तेमाल नहीं किया। वह फूलों से सजी बैलगाड़ी पर बैठकर बारात लेकर पहुंचा। जैसे ही बारात गांव की सड़कों से गुजरी, लोगों की नजरें उसी पर टिक गईं। हर कोई इस अलग अंदाज की शादी को देखकर हैरान भी था और खुश भी। गांव के बुजुर्गों ने कहा कि वर्षों बाद उन्होंने ऐसी पारंपरिक बारात देखी है।

दुल्हन की विदाई ने भी जीता लोगों का दिल

शादी की रस्में पूरी होने के बाद सबसे भावुक पल दुल्हन की विदाई का था। खास बात यह रही कि दुल्हन भी उसी बैलगाड़ी में बैठकर अपने ससुराल के लिए रवाना हुई, जिस पर दूल्हा बारात लेकर आया था। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए बेहद खास बन गया। कई लोगों ने अपने मोबाइल फोन में इस पल को कैद किया। शादी में शामिल लोगों का कहना था कि आधुनिकता के दौर में लोग अपनी पुरानी परंपराओं को भूलते जा रहे हैं, लेकिन इस शादी ने एक बार फिर गांव की संस्कृति और रीति-रिवाजों को जीवंत कर दिया। यही वजह है कि यह शादी केवल एक पारिवारिक कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई।

लोक संगीत ने बढ़ाई समारोह की खूबसूरती

इस शादी में तेज आवाज वाले डीजे की जगह स्थानीय लोक संगीत को महत्व दिया गया। बारात के दौरान पारंपरिक गीत गाए गए और लोग उन्हीं धुनों पर झूमते नजर आए। बाराती वाहनों की बजाय पैदल चलते हुए खुशी का इजहार कर रहे थे। शादी की सभी रस्में स्थानीय परंपराओं के अनुसार पूरी की गईं। इससे समारोह में एक अलग ही अपनापन दिखाई दिया। गांव के लोगों ने बताया कि लोक संगीत और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ होने वाली शादियां लोगों को अपनी संस्कृति से जोड़ती हैं। यही कारण है कि इस आयोजन को देखने वाले लोग इसे लंबे समय तक याद रखने की बात कह रहे हैं।

बिना दहेज शादी कर दिया बड़ा सामाजिक संदेश

इस शादी की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें दहेज का कोई लेन-देन नहीं हुआ। दूल्हे और उसके परिवार ने साफ संदेश दिया कि शादी रिश्तों का बंधन है, कोई सौदा नहीं। उनका मानना है कि विवाह सम्मान, विश्वास और प्यार पर आधारित होना चाहिए, न कि पैसों और सामान पर। इस सोच की लोगों ने जमकर सराहना की। सोशल मीडिया पर भी शादी की तस्वीरें और वीडियो तेजी से साझा किए जा रहे हैं। कई लोगों ने इसे समाज के लिए प्रेरणादायक कदम बताया। लोगों का कहना है कि अगर अधिक परिवार इस तरह की सोच अपनाएं तो दहेज जैसी बुराइयों को खत्म करने में मदद मिल सकती है। सादगी, संस्कृति और अच्छे संदेश के कारण यह शादी अब दूर-दूर तक चर्चा में बनी हुई है।

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