Homeदेशगलती से मर्दों के खाते में गए जीविका के पैसे वापस नहीं...

गलती से मर्दों के खाते में गए जीविका के पैसे वापस नहीं लेगी नीतीश सरकार, नोटिस का डर खत्म

-

बिहार में जीविका योजना से जुड़े सैकड़ों परिवार उस वक्त चिंता में आ गए, जब कुछ पुरुषों के खातों में गलती से 10,000 रुपये जमा होने के बाद उन्हें वसूली का नोटिस भेजा गया। यह राशि दरअसल महिलाओं के लिए शुरू की गई मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की पहली किस्त थी, जो सीधे लाभार्थी महिलाओं के बैंक खातों में ट्रांसफर की जानी थी। लेकिन तकनीकी और दस्तावेजी त्रुटियों के कारण करीब 470 दिव्यांग पुरुषों के खातों में यह रकम चली गई। नोटिस मिलते ही कई लोगों में डर फैल गया कि अब उनसे पैसा वापस लिया जाएगा, जुर्माना लगेगा या कानूनी कार्रवाई हो सकती है। ग्रामीण इलाकों में यह मुद्दा तेजी से चर्चा का विषय बन गया और लोगों ने इसे गरीबों पर बोझ डालने वाला कदम बताया।

विपक्ष के सवाल और सरकार से मांगी गई रिपोर्ट

मामला जब सामने आया तो विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला। आरोप लगाया गया कि गरीब और दिव्यांग लोगों से गलती का पैसा वापस लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। इसके बाद बिहार सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने जीविका से पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब की। जांच में सामने आया कि यह कोई जानबूझकर किया गया फर्जीवाड़ा नहीं, बल्कि भुगतान प्रक्रिया में हुई मानवीय गलती थी। मंत्री ने स्पष्ट कहा कि जिन लोगों के खातों में यह राशि गई है, उन्होंने खुद कोई गलत जानकारी नहीं दी थी। ऐसे में उनसे वसूली करना न तो व्यावहारिक है और न ही न्यायसंगत।

सरकार का बड़ा फैसला और आधिकारिक सफाई

जांच रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने बड़ा और राहत भरा फैसला लिया। यह साफ कर दिया गया कि गलती से जिन पुरुषों के खातों में जीविका योजना की रकम चली गई है, उनसे अब एक भी रुपया वापस नहीं लिया जाएगा। ग्रामीण विकास विभाग ने कहा कि इस तरह की तकनीकी गलतियों की जिम्मेदारी लाभार्थियों पर नहीं डाली जा सकती। सरकार ने यह भी बताया कि जीविका स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 1.51 करोड़ से अधिक महिलाओं को तय प्रक्रिया के तहत राशि मिल चुकी है और आगे के भुगतान में अतिरिक्त सावधानी बरती जाएगी। इस फैसले के बाद नोटिस पाने वाले लोगों ने राहत की सांस ली और प्रशासन के प्रति भरोसा कुछ हद तक बहाल हुआ।

चुनावी माहौल और सामाजिक संदेश

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि सामाजिक और चुनावी संदेश भी देता है। विधानसभा चुनाव से पहले सरकार यह दिखाना चाहती है कि वह गरीब, दिव्यांग और कमजोर वर्ग के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की छवि एक संवेदनशील नेता की रही है, और यह निर्णय उसी दिशा में देखा जा रहा है। वहीं, सरकार ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में ऐसी गलतियों से बचने के लिए बैंक डेटा, आधार लिंकिंग और लाभार्थी सत्यापन प्रक्रिया को और मजबूत किया जाएगा। कुल मिलाकर, जीविका योजना से जुड़े इस फैसले ने न सिर्फ सैकड़ों लोगों को राहत दी है, बल्कि यह भी साफ कर दिया है कि गलती का बोझ अब आम जनता पर नहीं डाला जाएगा।

Read More-कर्नाटक की सत्ता में नया मोड़! CM रेस में एक और दिग्गज की एंट्री, सोनिया-खरगे से मुलाकात तय?

Related articles

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Latest posts