Bihar Sugar Price: बिहार में चीनी की कीमतों में अचानक बड़ा उछाल आया है। करीब एक महीने पहले 45 रुपये किलो बिकने वाली चीनी अब कई जगह 62 से 65 रुपये किलो तक पहुंच गई है। त्योहारी सीजन से पहले बढ़े दामों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सरकार ने जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए जांच के निर्देश दिए हैं। तय सीमा से ज्यादा स्टॉक मिलने पर कारोबारियों के खिलाफ FIR की कार्रवाई की जा सकती है।
एक महीने में ₹20 तक महंगी हुई चीनी, सरकार ने दिए जांच के आदेश
बिहार में चीनी के बढ़ते दामों को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने कहा है कि राज्य की चालू चीनी मिलों में पर्याप्त मात्रा में चीनी उपलब्ध है। इसके बावजूद बाजार में कीमत बढ़ने की शिकायत सामने आ रही है। सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए चीनी मिलों और कारोबारियों के स्टॉक की जांच कराने का फैसला किया है। अधिकारियों को यह पता लगाने के निर्देश दिए गए हैं कि कहीं व्यापारी जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करके बाजार में कृत्रिम कमी तो नहीं बना रहे हैं। खासकर त्योहारों के दौरान मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने से चीनी की खपत बढ़ जाती है। ऐसे में कीमतों में यह बढ़ोतरी आम परिवारों के बजट पर सीधा असर डाल सकती है।
400 टन से ज्यादा चीनी मिली तो होगी FIR, पांच जिलों में जांच तेज
केंद्र सरकार ने 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक चीनी कारोबारियों के लिए 400 टन की स्टॉक सीमा तय की है। बिहार में भी इस नियम को सख्ती से लागू करने की तैयारी है। अगर किसी व्यापारी के गोदाम में तय सीमा से अधिक चीनी पाई जाती है और नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो उसके खिलाफ FIR दर्ज की जा सकती है। गन्ना उद्योग विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह ने पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, समस्तीपुर और सीतामढ़ी के जिलाधिकारियों तथा चीनी मिल संचालकों को इस संबंध में निर्देश भेजे हैं। जांच के लिए संयुक्त टीमें बनाई जाएंगी, जिनमें वरीय उप समाहर्ता और ईख पदाधिकारी शामिल होंगे। ये टीमें चीनी मिलों और व्यापारियों के गोदामों में मौजूद स्टॉक का मौके पर सत्यापन करेंगी। सरकार ने चीनी मिलों के स्टॉक को लेकर भी नियम सख्त किए हैं। बिक्री के बाद मिल परिसर में चीनी को अधिकतम सात दिन तक रखने की व्यवस्था बताई गई है।
चीनी के दाम बढ़ने के पीछे क्या वजह? जमाखोरी से लेकर उत्पादन तक पर नजर
चीनी की कीमत बढ़ने के पीछे कई संभावित कारण बताए जा रहे हैं। इनमें चीनी उत्पादन में कमी, बाजार में उपलब्ध स्टॉक घटने और इथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के इस्तेमाल में बढ़ोतरी जैसे कारण शामिल हैं। दूसरी ओर, सरकार को आशंका है कि कुछ कारोबारी और बिचौलिए भविष्य में कीमत बढ़ने की उम्मीद में बड़ी मात्रा में चीनी जमा कर सकते हैं। इससे बाजार में कृत्रिम कमी पैदा होने का खतरा है। यही वजह है कि सरकार अब स्टॉक की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए भौतिक जांच करा रही है। त्योहारी सीजन में मिठाई और घरेलू इस्तेमाल के लिए चीनी की मांग बढ़ने वाली है। ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती कीमतों को नियंत्रित रखने की है। अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि चीनी के दाम बढ़ने की असली वजह आपूर्ति और उत्पादन से जुड़ी है या फिर जमाखोरी और कालाबाजारी ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई है।
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