एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक शक्तिशाली तूफान ने चिंता बढ़ा दी है। टाइफून सौडेल तेजी से ताकतवर हो रहा है और इसकी हवाओं की रफ्तार करीब 220 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। तूफान की गंभीरता को देखते हुए उत्तरी मरियाना द्वीप समूह के कई इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है। पागन, एग्रिहान और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने की सलाह दी गई है। प्रशासन की ओर से निचले और तटीय इलाकों पर खास नजर रखी जा रही है, क्योंकि तेज हवाओं के साथ भारी बारिश और समुद्र में ऊंची लहरों का खतरा बना हुआ है।
अगले 12 से 48 घंटे अहम, प्रशासन ने बढ़ाई तैयारी
तूफान की स्थिति को देखते हुए सायपान और आसपास के क्षेत्रों में आपात तैयारियां तेज कर दी गई हैं। समुद्र में मौजूद जहाजों और मछुआरों को सुरक्षित स्थानों पर लौटने की सलाह दी गई है। वहीं संवेदनशील इलाकों में लोगों को शेल्टर में जाने के लिए कहा गया है। प्रशासन संचार व्यवस्था के जरिए लगातार मौसम की जानकारी लोगों तक पहुंचा रहा है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक अगले 24 से 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं। तूफान की दिशा और ताकत में बदलाव के आधार पर इसका असर अलग-अलग इलाकों में कम या ज्यादा हो सकता है। ऐसे में अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देकर आधिकारिक चेतावनियों का पालन करने की अपील की है।
समुद्र का बढ़ता तापमान बना चिंता की वजह
मौसम विशेषज्ञ इस तरह के शक्तिशाली तूफानों के पीछे समुद्र की गर्म होती सतह और मौसमी परिस्थितियों को भी अहम कारण मानते हैं। समुद्र का तापमान बढ़ने पर चक्रवाती सिस्टम को ज्यादा ऊर्जा मिल सकती है, जिससे उसकी ताकत बढ़ने की संभावना रहती है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में पहले भी कई खतरनाक तूफान भारी बारिश और बाढ़ का कारण बन चुके हैं। चीन के तटीय इलाकों में भी खराब मौसम को लेकर निगरानी बढ़ाई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे सिस्टम में हवा की रफ्तार के अलावा भारी बारिश और बाढ़ भी बड़ी चुनौती बन सकती है। इसलिए केवल समुद्र के किनारे रहने वाले लोगों को ही नहीं, बल्कि निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को भी सावधानी बरतने की जरूरत है।
पिछली तबाही ने बढ़ाई चिंता, इस बार पहले से तैयारी
तूफान सौडेल को लेकर प्रशासन इसलिए भी सतर्क है क्योंकि एशिया के कई हिस्से हाल के वर्षों में शक्तिशाली तूफानों और बाढ़ की मार झेल चुके हैं। भारी बारिश के कारण नदियों और जलाशयों का जलस्तर अचानक बढ़ने से कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। ऐसे अनुभवों को देखते हुए इस बार आपात सेवाओं को अलर्ट रखने और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। फिलहाल सबसे ज्यादा ध्यान तूफान की दिशा और उसकी गति पर है। अगर सिस्टम की ताकत बढ़ती है या इसका रास्ता तटीय इलाकों की ओर बदलता है, तो खतरा और गंभीर हो सकता है। इसलिए अगले कुछ घंटों में मौसम विभाग के अपडेट पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा।
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