अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की चाल और घरेलू ऊर्जा बाजार को संतुलित करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बार फिर बड़ा और अहम कदम उठाया है। सरकार ने पेट्रोल-डीजल के निर्यात पर लगने वाले ‘विंडफॉल टैक्स’ (Windfall Tax) की दरों में भारी बढ़ोतरी कर दी है। आज यानी 3 अगस्त से लागू हुए इस नए आदेश के बाद से तेल निर्यात करने वाली कंपनियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और रिफाइनिंग कंपनियों के अप्रत्याशित मुनाफे (Windfall Gain) को देखते हुए सरकार ने यह समीक्षा की है। सरकार के इस फैसले से देश की इकोनॉमी और ऊर्जा बाजार में हलचल तेज हो गई है, और हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर इस टैक्स के बढ़ने का असर आम आदमी और बाजार पर किस तरह से पड़ने वाला है।
कितना महंगा हुआ निर्यात? पेट्रोल और डीजल पर नई टैक्स दरें लागू
सरकार की ओर से जारी किए गए नए आंकड़ों के मुताबिक, पेट्रोल और डीजल दोनों के निर्यात पर टैक्स को पहले के मुकाबले काफी बढ़ा दिया गया है। अगर बात करें पेट्रोल की, तो इसके निर्यात पर लगने वाले टैक्स को 2.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 3.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं, दूसरी ओर डीजल के निर्यात पर टैक्स में बहुत बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिली है। डीजल पर लगने वाला टैक्स 15.5 रुपये प्रति लीटर से सीधे उछलकर 24 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। सरकार द्वारा यह कड़ा फैसला वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों के मार्जिन को ध्यान में रखकर लिया गया है, ताकि तेल कंपनियां देश के बाहर भारी मुनाफा कमाने के चक्कर में घरेलू बाजार को नजरअंदाज न करें और सरकारी खजाने को भी इसका उचित लाभ मिल सके।
क्या आम जनता की जेब पर पड़ेगा इसका असर? खुदरा कीमतों की पूरी सच्चाई
इस बड़ी टैक्स बढ़ोतरी के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल जो आम नागरिकों के मन में उठ रहा है, वह यह है कि क्या अब देश के अंदर पेट्रोल और डीजल के दाम भी आसमान छूने लगेंगे? तो आपको बता दें कि इस टैक्स बढ़ोतरी का घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की खुदरा (Retail) कीमतों पर फिलहाल कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। यानी आपके शहर में पेट्रोल और डीजल के जो दाम पहले चल रहे थे, वे वैसे ही बने रहेंगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि ‘विंडफॉल टैक्स’ केवल उस ईंधन पर लागू होता है जिसे देश की कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात (Export) करती हैं, न कि उस ईंधन पर जो भारत के आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल पंपों पर बेचा जाता है। इसलिए, आम जनता को फिलहाल खुदरा महंगाई से राहत मिली हुई है।
तेल कंपनियों के मुनाफे पर ब्रेक और सरकार के इस फैसले के पीछे की असली वजह
विंडफॉल टैक्स मूल रूप से उन कंपनियों पर शिकंजा कसने के लिए लगाया जाता है जो वैश्विक बाजार में अचानक कीमतें बढ़ने के कारण भारी-भरकम मुनाफा (अचानक मिलने वाला लाभ) कमा लेती हैं। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम चढ़ते हैं, तो प्राइवेट और सरकारी रिफाइनरियों का मुनाफा अचानक बहुत बढ़ जाता है। ऐसे में सरकार इस अतिरिक्त मुनाफे का एक हिस्सा टैक्स के रूप में वसूलती है। इस बार डीजल के टैक्स में की गई भारी वृद्धि यह साफ संकेत देती है कि सरकार विदेशी बाजारों में हो रही बंपर कमाई पर लगाम कसना चाहती है। इसके अलावा, इसका एक और गुप्त उद्देश्य यह सुनिश्चित करना भी है कि कंपनियां अपने मुनाफे के लालच में घरेलू बाजार में ईंधन की सप्लाई कम न करें, जिससे देश के भीतर किसी भी तरह की ईंधन किल्लत या संकट की स्थिति पैदा न हो सके।
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