वाराणसी से एक बार फिर धर्म और राजनीति के बीच नई बहस शुरू हो गई है। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शनिवार सुबह अपनी ‘गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध यात्रा’ की शुरुआत कर दी। यह यात्रा वाराणसी से लखनऊ तक जाएगी और इसका मुख्य उद्देश्य गौ हत्या के खिलाफ जनजागरण करना बताया जा रहा है। यात्रा की शुरुआत विद्यामठ से हुई, जहां शंकराचार्य पालकी में सवार होकर निकले। इस दौरान उन्होंने गौ पूजन किया और समर्थकों के साथ धार्मिक मंत्रोच्चार के बीच यात्रा आगे बढ़ी। यात्रा शुरू होते ही उन्होंने सरकार पर सवाल भी उठाए और कहा कि अब ऐसी स्थिति बन गई है कि अपने ही द्वारा चुनी गई सरकारों के सामने गौ माता की रक्षा के लिए आवाज उठानी पड़ रही है। उनके इस बयान के बाद यात्रा को लेकर राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
‘गौ माता को बचाने के लिए निकलना पड़ा’, सरकार पर साधा निशाना
यात्रा शुरू करते समय शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यह कोई राजनीतिक यात्रा नहीं है बल्कि धर्म और आस्था से जुड़ा अभियान है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग इस यात्रा के राजनीतिक मायने निकाल सकते हैं, लेकिन उनका उद्देश्य केवल गौ माता की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि आज हर हिंदू चाहता है कि देश में गौ हत्या पूरी तरह बंद हो। अगर गौ माता संकट में है तो उसके समाधान के लिए समाज को एकजुट होना पड़ेगा। शंकराचार्य ने यह भी कहा कि जब तक गौ हत्या पर सख्त रोक नहीं लगती, तब तक समाज को जागरूक करने के लिए ऐसे अभियान जरूरी हैं। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि सभी हिंदू समाज के लोग जाति और वर्ग से ऊपर उठकर इस मुद्दे पर एकजुट हों और गौ रक्षा के लिए आवाज बुलंद करें।
यात्रा रोके जाने पर क्या बोले शंकराचार्य? दिया यह जवाब
धर्मयुद्ध यात्रा को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी सतर्कता देखी जा रही है। वाराणसी में यात्रा शुरू होने से पहले विद्यामठ गली के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। इस बीच जब शंकराचार्य से पूछा गया कि अगर प्रशासन यात्रा को रोकता है तो क्या होगा, इस पर उन्होंने कहा कि जब रोका जाएगा तो रुक जाएंगे, लेकिन सवाल यह है कि आखिर रोका क्यों जाएगा। उन्होंने कहा कि यह यात्रा किसी के खिलाफ नहीं बल्कि गौ माता के सम्मान और संरक्षण के लिए है। उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक सरकार की ओर से कोई संदेश नहीं आया है, लेकिन अगर कोई संवाद होगा तो उसका स्वागत किया जाएगा। शंकराचार्य ने सांसदों और विधायकों से भी अपील की कि वे इस यात्रा में शामिल होकर गौ रक्षा के मुद्दे पर अपना समर्थन दें।
वाराणसी से लखनऊ तक जाएगा काफिला, कई जिलों में होगा स्वागत
धर्मयुद्ध यात्रा का कार्यक्रम पहले से तय किया गया है और यह कई जिलों से होकर लखनऊ पहुंचेगी। शनिवार सुबह यात्रा की शुरुआत के बाद शंकराचार्य ने सबसे पहले चिंतामणि गणेश मंदिर में दर्शन किए और इसके बाद संकट मोचन मंदिर जाने की बात कही। इसके बाद यात्रा वाराणसी शहर के अलग-अलग इलाकों से होते हुए आगे बढ़ेगी। यात्रा का पहला दिन वाराणसी से जौनपुर, सुल्तानपुर, गौरीगंज और अमेठी होते हुए रायबरेली तक जाएगा, जहां रात्रि विश्राम का कार्यक्रम रखा गया है। रास्ते में कई जगहों पर धार्मिक संगठनों और स्थानीय लोगों द्वारा स्वागत की तैयारी भी की गई है। बताया जा रहा है कि लखनऊ पहुंचकर शंकराचार्य गौ रक्षा के मुद्दे पर बड़ा संदेश दे सकते हैं, जिसके कारण इस यात्रा को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी खास दिलचस्पी देखी जा रही है।
