दिल्ली के सबसे व्यस्त और बड़े व्यापारिक इलाकों में गिने जाने वाले सदर बाजार में होली के दिन एक भीषण अग्निकांड ने पूरे इलाके को दहला दिया। जब पूरा शहर रंगों और खुशियों में डूबा हुआ था, उसी समय सदर बाजार की तंग गलियों में स्थित एक बहुमंजिला इमारत में अचानक आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और पांच मंजिला इमारत पूरी तरह लपटों में घिर गई। इस इमारत में खिलौनों का गोदाम और कई दुकानें संचालित होती थीं, जिससे आग तेजी से फैलती चली गई।
आग इतनी तेज थी कि आसपास के लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। धुआं और लपटें इतनी तेजी से फैल रही थीं कि इमारत में मौजूद कई लोग बाहर निकलने के लिए इधर-उधर भागने लगे। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी। कुछ ही देर में दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का काम शुरू हुआ। लेकिन संकरी गलियों और भीड़भाड़ के कारण दमकल की गाड़ियों को घटनास्थल तक पहुंचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस हादसे में दो लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई लोगों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
शव इस कदर जले कि पहचान भी मुश्किल
इस हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू तब सामने आया जब मृतकों के परिवार वाले दिल्ली पहुंचे। आग इतनी भीषण थी कि दोनों मृतकों के शव पूरी तरह जल चुके थे। हालत यह थी कि उनके अपने परिजन भी शवों की पहचान नहीं कर पा रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, मृतकों में एक 35 वर्षीय युवक राम प्रवेश थे, जो बिहार के सीतामढ़ी जिले के रहने वाले थे। वह पिछले कई सालों से सदर बाजार की एक खिलौनों की दुकान में काम कर रहे थे। जैसे ही उनके परिवार को हादसे की खबर मिली, उनकी पत्नी अपने छोटे बेटे के साथ दिल्ली पहुंची। लेकिन जब उन्होंने मोर्चरी में शव देखा तो वह अपने पति की पहचान नहीं कर सकीं। वहीं दूसरे मृतक धुरखली उर्फ शंकर थे, जो बिहार के खगड़िया जिले के निवासी बताए जा रहे हैं। उनका बेटा भी दिल्ली पहुंचा, लेकिन वह भी अपने पिता की पहचान करने में असमर्थ रहा।
अब हालात ऐसे बन गए हैं कि पुलिस को मृतकों की पहचान के लिए डीएनए टेस्ट का सहारा लेना पड़ रहा है। पुलिस ने दोनों शवों से दांतों के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे हैं और मृतकों के परिजनों के ब्लड सैंपल भी लैब में भेज दिए गए हैं। जब तक रिपोर्ट नहीं आती, तब तक परिवार अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार भी नहीं कर पाएंगे।
जिम्मेदारी निभाते-निभाते चली गई जान
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं था, बल्कि जिम्मेदारी निभाने की कोशिश में हुई मौत की कहानी भी है। बताया जा रहा है कि राम प्रवेश पिछले करीब 15 साल से उसी दुकान में काम कर रहे थे जहां आग लगी थी। जब आग भड़की तो उन्होंने खुद को बचाने की बजाय आग बुझाने की कोशिश शुरू कर दी। वह पानी की बाल्टियां लेकर लपटों को काबू करने की कोशिश कर रहे थे ताकि दुकान और सामान को नुकसान से बचाया जा सके। लेकिन देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और वह उसमें फंस गए।
इसी तरह धुरखली उर्फ शंकर भी अपनी जीवनभर की कमाई को बचाने के लिए नीचे की मंजिल की ओर भागे थे। लेकिन आग इतनी तेजी से फैल चुकी थी कि वह बाहर नहीं निकल पाए और लपटों में घिर गए। दोनों की मौत ने यह दिखा दिया कि कई बार लोग अपनी जिम्मेदारी और मेहनत से कमाए सामान को बचाने की कोशिश में अपनी जान तक गंवा देते हैं। इस हादसे ने दो परिवारों को हमेशा के लिए गहरा दुख दे दिया है।
पुलिस की बहादुरी से बचीं कई जिंदगियां
इस भीषण हादसे के बीच एक राहत भरी खबर भी सामने आई। आग लगने के तुरंत बाद स्थानीय पुलिसकर्मियों ने बहादुरी दिखाते हुए कई लोगों की जान बचाई। बताया जा रहा है कि दमकल विभाग के पहुंचने से पहले ही सदर थाना के हवलदार प्रदीप डागर और सिपाही संदीप चौधरी मौके पर पहुंच गए थे।
उन्होंने बिना अपनी जान की परवाह किए जलती इमारत में प्रवेश किया और लोहे की जाली तोड़कर बालकनी में फंसे लोगों तक पहुंचे। इसके बाद उन्होंने पास की एक मस्जिद के रास्ते पांच लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। अगर पुलिसकर्मी समय पर वहां नहीं पहुंचते तो मरने वालों की संख्या और भी बढ़ सकती थी।
हालांकि इस घटना ने एक बार फिर सदर बाजार जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। संकरी गलियां, पुरानी इमारतें और सुरक्षा मानकों की कमी के कारण यहां आग लगने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सुरक्षा इंतजामों पर ध्यान दिया जाता तो शायद इस तरह का दर्दनाक हादसा टाला जा सकता था। फिलहाल दोनों परिवारों की नजर अब डीएनए रिपोर्ट पर टिकी है, जिसके बाद ही उन्हें अपने प्रियजनों के अंतिम अवशेष मिल पाएंगे।
