दुनिया भर की एयरलाइंस उस समय सतर्क हो गईं जब एयरबस A320 परिवार के विमानों में फ्लाइट कंट्रोल से जुड़ी एक गंभीर समस्या उजागर हुई। हाल ही में हुई एक उड़ान में, विमान के ELAC (Elevator Aileron Computer) फ्लाइट कंट्रोल कंप्यूटर ने अचानक स्विच होने में गड़बड़ी दिखाई। यह कंप्यूटर विमान के पिच और रोल यानी उड़ान के संतुलन को नियंत्रित करता है। तकनीकी टीमों ने शुरुआती जांच में पाया कि जिस समय कंप्यूटर में खराबी दिखी, उसी समय उच्च स्तर का सोलर रेडिएशन भी रिकॉर्ड किया गया था। विशेषज्ञों के अनुसार, कभी-कभी स्पेस वेदर या सौर विकिरण संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक मॉड्यूल पर असर डाल सकता है। इससे कंप्यूटर ने कुछ सेकंड के लिए प्रतिक्रिया देना बंद कर दिया, लेकिन पायलटों की सूझ-बूझ के चलते स्थिति को संभाल लिया गया।
इस घटना के सामने आते ही एविएशन अथॉरिटीज और एयरबस ने इसे तकनीकी सुरक्षा से जुड़ा उच्च-स्तरीय मामला माना और तुरंत सभी ऑपरेटिंग एयरलाइंस को जांच और अपग्रेड प्रोसेस शुरू करने की सलाह दी।
एयरबस A320 विमानों को ग्राउंड करने का बड़ा फैसला
इस तकनीकी खामी की पुष्टि होते ही कई देशों की एयरलाइंस ने A320 परिवार के विमानों को अस्थायी रूप से सेवा से बाहर करना शुरू कर दिया। इन विमानों को अब व्यापक सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर अपग्रेड से गुजरना होगा, जिससे ELAC कंप्यूटर की मजबूती और विश्वसनीयता में बढ़ोतरी हो सके।
अधिकांश एयरलाइंस ने अपने बेड़े में A320 की संख्या को देखते हुए चरणबद्ध तरीके से अपग्रेड शुरू किए हैं, ताकि यात्रियों पर न्यूनतम असर पड़े। लेकिन फिर भी समय-सारिणी में बड़े पैमाने पर देरी और कई उड़ानों के कैंसिल होने की खबरें सामने आई हैं।
ग्राउंडिंग की वजह से हजारों यात्रियों को एयरपोर्ट पर लंबे इंतजार, टिकट बदलने और रूट डायवर्जन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा है। एयरलाइंस यात्रियों को वैकल्पिक उड़ानें उपलब्ध कराने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन वैश्विक स्तर पर यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बन गई है।
क्या है ELAC कंप्यूटर और क्यों हुई गड़बड़ी?
ELAC यानी Elevator Aileron Computer, एयरबस A320 के फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह कंप्यूटर पायलट और ऑटोपायलट से मिलने वाले इनपुट के आधार पर विमान के एलेरोन, एलीवेटर और अन्य कंट्रोल सरफेस को मैनेज करता है, जिससे विमान सुरक्षित उड़ान भर सके।
जांच में यह पता चला है कि ELAC कंप्यूटर के दो यूनिट्स के बीच स्विचिंग के दौरान एक संक्षिप्त ‘लॉजिकल ग्लिच’ हुआ। सामान्य स्थितियों में एक यूनिट से दूसरी यूनिट पर बिना किसी बाधा के नियंत्रण ट्रांसफर हो जाना चाहिए। लेकिन इस बार सिस्टम ने गलत तरीके से रिस्पॉन्ड किया।
विशेषज्ञों का दावा है कि इस समय आसमान में सोलर रेडिएशन का प्रभाव असामान्य रूप से अधिक था। इस तरह की घटनाएँ दुर्लभ होती हैं लेकिन असंभव नहीं। आधुनिक विमान इलेक्ट्रॉनिक इंटरफेरेंस से बचाने के लिए डिजाइन किए जाते हैं, फिर भी कुछ संवेदनशील चिप्स उच्च विकिरण स्तरों पर प्रभावित हो सकते हैं।
अपग्रेड के बाद कब सामान्य होंगी उड़ानें?
एयरबस ने तुरंत अपने सभी पार्टनर ऑपरेटरों के साथ मीटिंग की और एक अपग्रेड पैकेज जारी किया, जिसमें ELAC कंप्यूटर के लिए नया सॉफ्टवेयर पैच और एक हार्डवेयर रिइंफोर्समेंट मॉड्यूल शामिल है।
यह अपग्रेड हर विमान के लिए 10 से 14 घंटे का समय ले सकता है, इसलिए हजारों विमानों पर इस प्रॉसेस को पूरा करने में कुछ सप्ताह लग सकते हैं। कई एयरलाइंस ने इसे प्राथमिकता में रखा है ताकि छुट्टियों और त्योहारों के मौसम में यात्रियों को मुश्किलों का सामना न करना पड़े।
एविएशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस अपग्रेड के बाद A320 की सुरक्षा और भी मजबूत हो जाएगी, क्योंकि अब सिस्टम सोलर रेडिएशन जैसी परिस्थितियों को बेहतर तरीके से झेल सकेगा।
एयरबस की ओर से बयान आया है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और सभी विमान तभी उड़ान के लिए अनुमति पाएंगे जब वे आवश्यक तकनीकी मानकों को पूरा करेंगे।
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