RHA Reservation Hatao Andolan News: नीट पेपर लीक को लेकर हुए छात्र आंदोलन के बाद सोशल मीडिया पर एक नया डिजिटल अभियान तेजी से चर्चा में आ गया है। इंस्टाग्राम पर ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन (RHA)’ नाम से चल रहे एक अकाउंट ने कुछ ही समय में लगभग 41 लाख फॉलोअर्स जुटा लिए हैं। यह अभियान मुख्य रूप से आरक्षण व्यवस्था पर बहस छेड़ने का दावा कर रहा है। सोशल मीडिया पर इसकी बढ़ती लोकप्रियता ने इसे चर्चा का विषय बना दिया है। कई यूजर्स इसे युवाओं की नई डिजिटल आवाज बता रहे हैं, जबकि कई लोग इसके विचारों का विरोध भी कर रहे हैं। इससे साफ है कि सोशल मीडिया अब केवल मनोरंजन का मंच नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर राय रखने का बड़ा माध्यम भी बनता जा रहा है।
RHA की क्या हैं प्रमुख मांगें?
RHA अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश केवल योग्यता, परीक्षा में प्राप्त अंकों और प्रतिभा के आधार पर होना चाहिए। अभियान के समर्थक यह भी मांग कर रहे हैं कि जरूरतमंद लोगों की सहायता आर्थिक स्थिति के आधार पर की जाए। इंस्टाग्राम पेज पर आरक्षण व्यवस्था के विरोध में कई पोस्ट और संदेश साझा किए जा रहे हैं। पेज पर ‘Reservation is Discrimination’ जैसे स्लोगन भी दिखाई दे रहे हैं। अभियान से जुड़े लोग दावा कर रहे हैं कि वे इस मुद्दे को देशव्यापी जन आंदोलन का रूप देना चाहते हैं। हालांकि सोशल मीडिया पर इस अभियान को लेकर समर्थन और विरोध, दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
CJP के बाद डिजिटल आंदोलन की नई तस्वीर
हाल के छात्र आंदोलनों के बाद सोशल मीडिया की ताकत एक बार फिर चर्चा में है। जिस तरह पहले कुछ बड़े ऑनलाइन अभियानों ने लाखों लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा, उसी तरह अब RHA भी तेजी से लोगों तक पहुंच रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आज की युवा पीढ़ी अपनी बात रखने और लोगों को जोड़ने के लिए इंस्टाग्राम, एक्स और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का अधिक इस्तेमाल कर रही है। इसी कारण कई लोग सोशल मीडिया को आधुनिक दौर का डिजिटल आंदोलन मंच भी मानने लगे हैं। हालांकि किसी भी ऑनलाइन अभियान की सफलता केवल फॉलोअर्स की संख्या से तय नहीं होती, बल्कि यह इस बात पर भी निर्भर करती है कि उसे समाज और संस्थाओं से कितना व्यापक समर्थन मिलता है।
आरक्षण पर बहस संवेदनशील, संवैधानिक व्यवस्था भी अहम
आरक्षण का विषय भारत में लंबे समय से सामाजिक, कानूनी और संवैधानिक चर्चा का हिस्सा रहा है। संविधान के तहत आरक्षण व्यवस्था का उद्देश्य ऐतिहासिक और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों को शिक्षा और रोजगार में अवसर उपलब्ध कराना है। ऐसे में इस विषय पर किसी भी प्रकार की मांग या आंदोलन को संवेदनशील माना जाता है। RHA अभियान के समर्थक अपनी मांगों को सोशल मीडिया के माध्यम से आगे बढ़ा रहे हैं, जबकि आरक्षण के पक्ष में खड़े कई संगठन इसे सामाजिक न्याय से जुड़ा महत्वपूर्ण अधिकार बताते हैं। फिलहाल यह अभियान डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तेजी से फैल रहा है, लेकिन भविष्य में इसका प्रभाव किस दिशा में जाएगा, यह आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा। इस मुद्दे पर किसी भी नीति में बदलाव का निर्णय केवल संवैधानिक और विधायी प्रक्रिया के तहत ही संभव है।
